उत्तराखंड की पहली पैनिक बटन वाली इलेक्ट्रिक बस का ट्रायल आज से शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सुबह साढ़े नौ बजे सीएम आवास से बस को हरी झंडी दिखाकर मसूरी के लिए रवाना किया। इसके साथ ही उन्होंने खुद भी बस में बैठकर सफर किया। अभी एक महीने तक इसका ट्रायल होगा इसके बाद नियमित रूप से चलेगी।
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पैनिक बटन वाली बस में बैठे सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत
तमिलनाडु से पहुंची इको फ्रेंडली बस में महिलाओं की सुरक्षा के साथ ही तमाम खूबियां हैं। एक महीने तक इलेक्ट्रिक बस शहर के विभिन्न रूटों पर चलेगी। ट्रायल सफल रहने पर 50 बसों को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर चलाया जाएगा। एक बार चार्ज होने के बाद बस 200 से 250 किलोमीटर का सफर तय करेगी। साथ ही 20 प्रतिशत बैकअप भी बना रहेगा। इसकी अधिकतम रफ्तार 80 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी। लगातार बढ़ रहे डीजल के दामों को देखते हुए यह इलेक्ट्रिक बस फायदेमंद साबित होगी। इसमें यात्रियों का सफर जहां सस्ता होगा, वहीं इस बस से प्रदूषण भी नहीं होगा।
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पैनिक बटन वाली बस में बैठे सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत
महिलाओं और युवतियों के साथ छेड़छाड़ की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए इलेक्ट्रिक बस में पैनिक बटन भी लगाया गया है। पैनिक बटन दबाते ही सायरन बजने के साथ वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू हो जाएगी। इसके जरिये बस को कहीं से भी ट्रैक किया जा सकता है। बस कहां पर है, वह किस स्टॉप पर कितने बजे पहुंचेगी, इन सभी चीजों की जानकारी यात्रियों को मिल सकेगी।
सुरक्षा की दृष्टि से बस के अंदर सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ है। जिसके जरिये बस के अंदर बैठे यात्रियों की रिकॉर्डिंग होगी। इससे महिलाओं के साथ छेड़छाड़ तथा लूट की घटनाओं को अंजाम देने वाले शातिर आसानी से दबोचे जा सकेंगे। इलेक्ट्रिक बस में बैठा पैसेंजर अगर उतरना चाहता है तो वह बस में दरवाजे के पास लगा एनएसआर बटन दबा सकता है। बटन के दबते ही चालक बस को रोक देगा और यात्री आराम से उतर जाएगा।
बस के भीतर हर सीट के सामने यूएसबी पोर्ट भी दिया गया है, जिसके जरिये यात्री अपने मोबाइल को भी चार्ज कर सकता है। डीजल से चलने वाली बसों में हर चार महीने में क्लच, गियर बॉक्स आदि को बदलना पड़ता है, वहीं इलेक्ट्रिक बस में ऐसा कुछ भी नहीं होता है। बेहद कम मेंटीनेंस होने के चलते इससे रोडवेज को काफी फायदा होगा।