पंत की सादगी के कई उदाहरण हैं। एक दिन किचन में जाकर चाय बनाने की बात सहज विश्वास करने लायक नहीं है।
...जब पंत खुद किचन में जाकर बनाने लगे चाय, उनकी सादी जिदंगी के हैं ऐसे कई उदाहरण, पढ़ें
दरअसल, रात को वह अपने निवास पर किसी फॉलोवर को नहीं रखते थे। एक दिन, सत्र के दौरान वह बगल वाले कमरे में आए और मीडियाकर्मियों को नींद से जगाया। बोले-आप लोग चाय लेंगे। उन्होंने संकुचाते हुए हां कहा, तो वह चले गए। वह यही सोच रहे थे कि कोई फॉलोवर आ गया होगा और वह चाय बना रहा होगा। फिर भी वह उत्सुकता वश किचन में पहुंचे, तो वहां प्रकाश पंत चाय बना रहे थे। यह स्थिति प्रकाश पंत की सादगी से जुड़ी उत्कृष्ट मिसाल के दर्शन कराने वाली भी।
प्रकाश पंत की व्यवहार कुशलता और अच्छे स्वभाव की वजह से मंत्री और विधायकों का सत्र के दौरान उनके घर पर आना जाना हर समय देखने को मिला। डॉ. हरक सिंह रावत और सुबोध उनियाल के बीच हंसी ठिठोली और वाद विवाद के बीच प्रकाश पंत हर बार बड़ी सूझबूझ से बात संभालते हुए दिखते। अफसरों के साथ गहन मंथन, लंबी बैठक के सत्र के दौरान कई बार दर्शन हुए। उन्हें किसी पर नाराज होते या चिल्लाते देखने की तो कभी स्थिति ही नहीं आई। अमर उजाला के वरिष्ठ पत्रकार विपिन बनियाल ने बजट 2018 को लेकर प्रकाश पंत से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
दिन-21 मार्च 2018 बुधवार, स्थान-गैरसैंण में मंत्री आवास। समय-साढे़ आठ बजे। वित्त मंत्री प्रकाश पंत डिनर के लिए तैयार हैं। हम तीन पत्रकार उनके साथ हैं। हमे चिंता है कि अगले दिन 22 मार्च को बजट की कवरेज किस तरह करेंगे। क्या प्लानिंग होगी। इसके विपरीत, दूसरी खाने की टेबल पर प्रकाश पंत हैं, जिन्हें बजट पेश करना है। मगर चिंता के लिए उनके चेहरे पर कोई जगह नहीं है। वह शांत चित्त हैं। अपनी तैयारी को लेकर आश्वस्त हैं।
रात के नौ बजे वह सोने के लिए अपने कमरे में चले जाते हैं। इसके बाद, सुबह पांच बजे उठते हैं। पूजा-अर्चना करते हैं। पंडित प्रकाश पंत के माथे पर बड़ा तिलक उनकी धार्मिक निष्ठा के दर्शन करा रहा है। सुबह नाश्ते की टेबल पर हम फिर उनके साथ हैं। अब भी उतने ही आश्वस्त, उतने ही शांत। शाम को चार बजे प्रकाश पंत सदन में आते हैं और प्रभावी ढंग से बजट पेश करते हैं। सत्र में पूरे दिन के नायक प्रकाश पंत ही रहते हैं।