रविवार को आई बाढ़ में लापता लोगों की तलाश का काम सोमवार देर रात तक जारी रहा। जैसे-जैसे समय बढ़ रहा है मलबे या सुरंग के अंदर जीवन की आस भी धूमिल होती जा रही है। 36 घंटे से अधिक बीतने के बाद भी सुरंग और मलबे में फंसे लोगों का कुछ पता नहीं लग सका है।
2 of 6
चमोली में आपदा के बाद बचाव कार्याें में लगी टीम
- फोटो : अमर उजाला
तपोवन जल विद्युत परियोजना की मुख्य सुरंग (13 किमी बननी है) पर तपोवन और सेलंग से काम चल रहा था। सेलंग से मशीन से करीब छह किमी सुरंग बन चुकी है, जबकि तपोवन की तरफ से मजदूर सुरंग बनाने में जुटे थे और तीन किमी सुरंग बन चुकी थी। इस सुरंग में कंपनी के 35 मजदूर और तीन इंजीनियर फंसे हैं।
3 of 6
चमोली में आपदा के बाद बचाव कार्याें में लगी टीम
- फोटो : अमर उजाला
बचाव दल का सबसे अधिक फोकस इसी सुरंग से मलबा हटाने पर है, लेकिन पानी और गाद के कारण रेस्क्यू में परेशानी हो रही है। मशीन से गाद हटाते ही पीछे से और गाद आ रही है। पूरा दिन ऐसे ही चलता रहा, जिस कारण बचाव दल टनल के अंदर तक नहीं पहुंच पा रहा है। सुरंग के अंदर फंसे लोगों के बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है।
4 of 6
चमोली में सुरंग के अंदर मलबा हटाती जेसीबी
- फोटो : अमर उजाला
टनल में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए सोमवार सुबह चार बजे से ही राहत-बचाव कार्य शुरू हो गया था। आईटीबीपी, सेना, एनडीआरएफ व आपदा प्रबंधन की टीमों ने सुरंग से मलबा हटाने का काम शुरू किया। ऑस्कर लाइट की रोशनी में रेस्क्यू अभियान चला।
5 of 6
तपोवन टनल में फंसे मजदूर
- फोटो : अमर उजाला
मलबा अधिक होने के कारण रेस्क्यू में दिक्कतें आने लगीं, जिसे देख आईटीबीपी के जवानों ने आवाजाही के लिए दलदली मिट्टी के ऊपर लकड़ी के तख्ते बिछाकर रास्ता बनाने का प्रयास किया। दिनभर मलबे में अंदर फंसे लोगों को ढूंढने का काम चलता रहा।