उत्तराखंड के चमोली जिले में आई आपदा के दौरान तपोवन क्षेत्र में बन रही सुरंग के अंदर कुछ मजदूर फंस गए थे। ऐसे मुश्किल हालातों में मजदूरों ने जीने की आस छोड़ दी थी। लेकिन तभी एक मोबाइल फोन ने उनकी जान बचाई। 520 मेगावाट वाली तपोवन जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में फंसे मजदूरों को जब बाहर निकाला गया तो उन्होंने सुरंग में फंसे रहने के दौरान के क्षणों को कुछ इस तरह बयान किया। चलिए आगे जानते हैं मजदूरों की आपबीती।
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तपोवन टनल में फंसे मजदूर
- फोटो : अमर उजाला
रेस्क्यू के बाद मजदूरों ने बताया कि सुरंग के अंदर पानी भरने पर जब काफी समय तक हमको बाहर नहीं निकाला जा सका तो सभी ने आस छोड़ दी थी कि अब वे जीवित रह सकेंगे। लेकिन सभी एक दूसरे को हौसला देते रहे। तनाव कम करने के लिए आपस में हंसी मजाक भी करते रहे। सुरंग में फंसने के करीब साढ़े छह घंटे के बाद जब हमको बाहर निकाला गया, तो ऐसा लगा नया जीवन मिल गया।
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तपोवन टनल में फंसे मजदूरों को निकालते जवान
- फोटो : अमर उजाला
ऋषि गंगा में ग्लेशियर फटने से आई बाढ़ के चलते तपोवन की सुरंग में फंसे 12 मजदूरों को आईटीबीपी के जवानों ने रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकाल दिया है। सभी को प्राथमिक उपचार के लिए आईटीबीपी अस्पताल में भर्ती किया गया है। अस्पताल में भर्ती राकेश भट्ट ने बताया कि अचानक सुरंग में मलबा आने पर वे सभी मशीनों के ऊपर चढ़ गए। सुरंग में मलबा और पानी भरने से बाहर जाने का रास्ता नहीं मिला।
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चमोली आपदा में बचाव कार्य करते जवान
- फोटो : अमर उजाला
तभी ध्यान गया कि एक साथी के पास मोबाइल फोन था, जिससे उन्होंने अधिकारियों से संपर्क किया और बताया कि वे सुरक्षित हैं, और उन्हें बाहर निकालें। इसके करीब साढ़े छह घंटे बाद उन्हें बाहर निकाला जा सका। वीरेंद्र कुमार गौतम ने बताया कि तेजी से मलबे के साथ पानी सुरंग में आया।
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तपोवन टनल तक जाने के लिए नीचे उतरते जवान
- फोटो : अमर उजाला
करीब तीन मीटर तक पानी भर गया था। जैसे-जैसे समय बढ़ रहा था, साथियों का हौसला टूटने लगा था। अस्पताल में भर्ती चित्रा, बसंतु, किरण, शिवराज आदि का कहना है कि बाहर आकर ऐसा लगा कि हमें नया जीवन मिल गया है। आईटीबीपी के चिकित्सक डा. संजय कुमार ने बताया कि सभी मजदूर खतरे से बाहर हैं। किसी को ज्यादा चोटें नहीं आई हैं।