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चमोली जल प्रलयः पीड़ितों ने बताई आंखों देखी, कहा- भयानक मंजर को याद कर के ही कांप रही रूह

Tue, 09 Feb 2021 09:18 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोशीमठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोशीमठ Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 09 Feb 2021 09:18 AM IST
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uttarakhand chamoli disaster latest news: people soul shaken when they remember that moment of flood
ग्लेशियर फटने से ऋषिगंगा में आई बाढ़ - फोटो : amar ujala

रविवार की आपदा में रैणी व आसपास गांव के पांच लोग बह गए। जिसमें किसी ने बेटा खो दिया तो किसी के आंखों के सामने उसका भाई रौद्र रूप लेती ऋषिगंगा में समा गया। बुजुर्ग दादी भागकर सुरक्षित स्थान पर नहीं पहुंच पाई और देखते ही देखते नजरों से ओझल हो गई। रैणी सहित आसपास के गांवों में मातम छाया हुआ है।

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ग्लेशियर फटने से ऋषिगंगा में आई बाढ़ - फोटो : ANI

परिजनों ने भरी आंखों से उस मंजर को बयां किया जब वह देखते रह गए और उनके सामने परिजन नदी की आगोश में चले गए। रविवार को ग्लेशियर फटने से ऋषिगंगा में आई बाढ़ से रैणी गांव को कभी न भूलने वाले जख्म दे दिए। रैणी गांव के गौरव सिंह ने डबडबाती आवाज में बताया कि वह अपनी दादी अमृता देवी (72) पुल के पास खेत में काम कर रहे थे।

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ग्लेशियर फटने से ऋषिगंगा में आई बाढ़ - फोटो : amar ujala

अचानक से नदी में ऊफान आया तो  वह कुछ समझ नहीं पाए। दोनों वहां से भागे। लेकिन बुजुर्ग दादी तेज  नहीं भाग पाई और मेरी नजरों के सामने नदी में समा गई। उसे इस बात का मलाल है कि वह दादी को नहीं बचा  पाया। देवेंद्र सिंह ने बताया कि  वह अपने भाई संजय सिंह (28  साल) के साथ नदी किनारे बकरी चरा रहे थे।

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ग्लेशियर फटने से ऋषिगंगा में आई बाढ़ - फोटो : amar ujala

नदी के ऊफान को देखकर दोनों भागे, लेकिन उसका भाई संजय नदी की चपेट में आ गया। रैणी पल्ली गांव के दरबान सिंह का कहना है कि उनका बेटा यशपाल (31 साल) शिवालय के निकट बकरी चुगा रहा था। नदी की बाढ़ के बाद से लापता है। जुगजू के पंज ने बताया कि उसकी मां माघी देवी (45 साल) काली मंदिर के पास घाट काट रही थी।

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ग्लेशियर फटने से ऋषिगंगा में आई बाढ़ - फोटो : amar ujala

नदी के फ्लड में मां बह गई। रैणी के खीम सिंह ने बताया कि उनका 28 वर्षीय पुत्र रणजी तसंह कंपनी में काम करता था। वह लापता है। चोरमी गांव के मंजीत रावत कंपनी में काम करता था। लेकिन उसका अभी तक कुछ पता नहीं चला है। उसके परिजन अजीतपाल रावत, शरद सिंह, अनुज सुबह ही तपोवन पहुंच गए थे। लेकिन शाम तक मंजीत का कोई सुराग नहीं लगा।

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