उत्तराखंड के सीएम तीरथ सिंह रावत के मंत्रिमंडल में इस बार चार नए चेहरों को जगह मिली है। वहीं, तीरथ मंत्रिमंडल में मदन कौशिक को छोड़ कर सभी पुराने मंत्रियों की वापसी हुई। राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने शुक्रवार शाम चार नए चेहरों समेत 11 कैबिनेट मंत्रियों को शपथ दिलाई।
उत्तराखंड: ये चार नए चेहरे हुए तीरथ मंत्रिमंडल में शामिल, यहां जानें उनके बारे में सब कुछ...
करीब सात साल सेना में सेवा दे चुके गणेश जोशी
विधायक गणेश जोशी को कैबिनेट मंत्री बनाए जाने के बाद मसूरी विधानसभा क्षेत्र में लोगों में खुशी की लहर है। लगातार तीन बार से विधायक गणेश जोशी तीन दशक से अधिक समय से लगातार राजनीति में सक्रिय रहे हैं। गणेश जोशी वर्ष 1966 में आरएसएस से जुड़े थे। डीएवी इंटर कालेज देहरादून से शिक्षा ग्रहण करने के बाद 1976 में गढ़वाल राइफल रेजीमेंट में बतौर सैनिक भर्ती हुए। लेकिन स्वास्थ्य कारणों से जून 1983 में सेना से स्वैच्छिक सेवानिवृत्त ले ली। वर्ष 1984 में गणेश जोशी ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। 1985 से 2005 तक उन्होंने भारतीय जनता युवा मोर्चा और भाजपा में विभिन्न पदों पर जिम्मेदारी संभाली। गणेश जोशी को पहली बार 2007 में पार्टी ने राजपुर विधानसभा से टिकट दिया और वे विधायक बने। 2012 में राजपुर विधानसभा आरक्षित होने के कारण गणेश जोशी को मसूरी से टिकट मिला और उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी को भारी मतों से हराया। 2017 में इसी सीट पर उन्होंने दोबारा चुनाव जीता।
गणेश जोशी ने कई सामाजिक व राजनीतिक आंदोलन में शिरकत की। 1991 में रामजन्म भूमि आंदोलन के दौरान गणेश जोशी जेल में भी रहे। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में उनकी अहम भूमिका रही। इस दौरान वे जेल भी गए। वर्ष 2000 में सरकार ने उन्हें राज्य आंदोलनकारी का दर्जा दिया। उत्तराखंड के युवाओं को सेना में भर्ती होने के लिए लंबाई के मानक को 167 सेमी से 162 कराने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यही नहीं गणेश जोशी ने 2013 की आपदा के बाद लोगों की भरपूर मदद की। भाजपा ने कई चुनावों में उन्हें स्टार प्रचारक की भूमिका में रखा। दिल्ली में 2015 और 2020 में हुए विधानसभा चुनाव और 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई। लंबे राजनीतिक अनुभव के बाद उन्हें अब पहली बार मंत्री बनने का अवसर मिला है। इससे समर्थकों में खुशी की लहर है।
पहली बार नैनीताल विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे बंशीधर भगत
बंशीधर भगत तत्कालीन उत्तर प्रदेश में 1991 में पहली बार नैनीताल विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे। इसी सीट से वे 1993 और 1996 में भी विधायक चुने गए थे। वर्ष 1996 में तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार में खाद्य रसद राज्यमंत्री और वन राज्य मंत्री की जिम्मेदारी मिली। साल 2000 में उन्होंने कृषि, सहकारिता, दुग्ध, पशुपालन, गन्ना विभागों के कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी संभाली।
बंशीधर भगत ने 2007 में हुए चुनाव में हल्द्वानी विधानसभा सीट से कांग्रेस के कद्दावर नेता डॉ. इंदिरा हृदयेश को हराया। इसके बाद खंडूरी सरकार में वन, परिवहन मंत्री समेत अन्य विभागों की जिम्मेदारी मिली। 2012 और 2017 में कालाढूंगी विधानसभा सीट पर जीत हासिल की। वर्ष 2012-13 और 2014-15 में विधानसभा की लोक लेखा समिति के अध्यक्ष भी चुने गए।
बंशीधर भगत ने विधानसभा चुनाव में केवल एक बार हार का सामना किया है। उन्होंने सात बार चुनाव लड़ा है, जिसमें छह बार विजयी रहे हैं। 2002 में वह हल्द्वानी विधानसभा सीट पर हुए चुनाव में कांग्रेस नेता डॉ. इंदिरा हृदयेश से चुनाव हार गए थे। हालांकि अगले ही चुनाव में उन्होंने इंदिरा से सीट छीनकर हार का हिसाब चुकता कर दिया। वहीं, बीते साल उन्हें भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था।
संस्कृत से पीएचडी हैं स्वामी यतीश्वरानंद
स्वामी यतीश्वरानंद करनाल जिले के गांव कैमला के रहने वाले हैं। उन्होंने 18 साल पहले गांव छोड़ दिया था। देश सेवा को प्राथमिकता देकर उन्होंने शादी नहीं की। स्वामी यतीश्वरानंद ने संस्कृत में पीएचडी की है। उन्होंने उत्तराखंड के दिग्गज नेता एवं निवर्तमान सीएम हरीश रावत को 12997 मतों से हराया था। पांच भाइयों में स्वामी यतीश्वरानंद सबसे छोटे हैं। वे उत्तराखंड विधानसभा की हरिद्वार ग्रामीण सीट से लगातार दूसरी बार चुनाव जीते थे। वे वर्तमान में हरिद्वार ग्रामीण से विधायक हैं। अब उन्होंने राज्यमंत्री के पद पर शपथ ली। उन्हें नए चेहरे के तौर पर जगह दी गई।
बिशन सिंह चुफाल ने ग्राम प्रधान से शुरू किया था राजनीतिक सफर
वर्तमान में डीडीहाट से विधायक बिशन सिंह चुफाल साल 1982 में बांकू गांव के ग्राम प्रधान बने थे। 1983 में डीडीहाट ब्लाक के ब्लाक प्रमुख बने थे। इसके बाद 1989 में पहली बार विधायक का चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए थे। 1996 में फिर भाजपा के टिकट पर उन्होंने विधायक का चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। उत्तराखंड गठन के बाद 2000 से 2002 तक कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) के अध्यक्ष रहे। 2003 से 2007 तक वे डीडीहाट विधायक रहे। 2007 से 2012 तक पहले ढाई साल कैबिनेट मंत्री रहे, फिर अगले ढाई साल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे। 2013 से 2017 तक फिर विधायक रहे। 2017 में वे लगातार पांचवी बार विधायक बने। अब उन्हें तीरथ कैबिनेट में उन्हें नए चेहरे के तौर पर जगह दी गई।