चाय बेचने से खेत जोतने तक क्या नहीं किया इन टॉपर्स ने
उत्तराखंड बोर्ड की मेरिट में जगह पाने वाले अधिकतर छात्र-छात्राएं ऐसे हैं जिन्होंने अपने जीवन में कठिन संघर्ष किया है। तस्वीरों में देखें, इनके संघर्ष की कहानी...
चाय बेचने से खेत जोतने तक क्या नहीं किया इन टॉपर्स ने
देहरादून जिले के डाकपत्थर निवासी धर्मवीर नेमेहनत के दम पर पिता के साथ चाय और पान की दुकान में हाथ बटाते हुए इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा में उत्तराखंड में छटा और देहरादून जिले में पहला स्थान हासिल किया। गरीबी में पढ़े लिखे धर्मवीर का लक्ष्य आईएएस अधिकारी बनकर देश की सेवा करना है।
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धर्मवीर के घर में बिजली का कनेक्शन कुछ माह पहले लगा है। ऐसे में उसने अधिकांश समय मोमबत्ती की रोशनी में पढ़ाई की। धर्मवीर ने जहां गणित में 100 में से 100 नंबर हासिल किए। वहीं भौतिकी में 99, रसायन में 95 और इंग्लिश, हिंदी में 84 अंक हासिल किए हैं।
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शहर की चकाचौंध से दूर उत्तराखंड में चमोली जिले के भेंटी गांव में किसान सब्बर सिंह के छोटे बेटे महावीर ने उत्तराखंड बोर्ड की इंटर परीक्षा में 90.40 फीसदी अंक प्राप्त कर राज्य में 16वीं रैंक प्राप्त की है। हर रोज जीआईसी घाट पहुंचने के लिए छह किमी की दूरी पैदल नापने के बावजूद महावीर ने घर का पूरा ख्याल रखा। पिता के साथ खेतों में हल भी लगाया।
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उत्तराखंड विद्यालयी माध्यमिक शिक्षा परिषद के हाईस्कूल परिणामों में एक वेटर का बेटा 92.2 प्रतिशत अंकों के साथ मसूरी का 'सरताज' बन गया। 10वीं की बोर्ड परीक्षा में मसूरी सरस्वती विद्या मंदिर के पकंज दास ने 92.2 प्रतिशत अंक हासिल कर मसूरी में टॉप किया है।