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वृक्ष मानव विश्वेश्वर दत्त की अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए किया जाएगा ये काम

Sun, 20 Jan 2019 10:22 AM IST
अलका त्यागी विनोद चमोली, अमर उजाला, चंबा (टिहरी)
विनोद चमोली, अमर उजाला, चंबा (टिहरी) Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 20 Jan 2019 10:22 AM IST
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Tree Man vishweshwar dutt saklani last wish will complete here
ऋषिकेश में हुआ विश्वेश्वर दत्त सकलानी - फोटो : अमर उजाला

जब पेड़ लगाओगे, तब जीवन सुरक्षित पाओगे की कहावत को चरितार्थ करने वाले प्रकृति के चितेरे प्रेमी विश्वेश्वर दत्त सकलानी अब पेड़ के रूप में जिंदा रहेंगे। सकलाना पट्टी में ताउम्र नि:स्वार्थ भाव से लाखों पेड़ लगाने की इबारत लिखने वाले वृक्ष मानव विश्वेश्वर दत्त की अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए पुजार गांव स्थित वृक्ष वंशावली वन में उनकी याद में पेड़ लगाया जाएगा। इसी वृक्ष वंशावली वन में अभी तक सकलानी वंश के पुरखों की स्मृति में विश्वेश्वर सकलानी ने पेड़ लगाकर प्रकृति प्रेम की नई परंपरा की शुरूआत की थी। 


 

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vishweshwar dutt saklani - फोटो : अमर उजाला

जन्म, विवाह और मृत्यु के मौके पर लोगों को एक पेड़ लगाने की नसीहत देने वाले वन ऋषि विश्वेश्वर ने खुद भी हमेशा इसका पालन किया। इसी का नतीजा है कि विशेश्वर दत्त ने अपने पुरखों की याद में पुजार गांव में पेड़ लगाकर वृक्ष वंशावली तैयार की है। इस वृक्ष वंशावली वन में सकलानी वंश के पूर्वज आज भी पेड़ के रूप में जिंदा हैं। इस वृक्ष वंशावली वन में जाते ही ग्रामीणों को अपने पुरखों की याद ताजा हो जाती है।
 

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vishweshwar dutt saklani

पर्यावरण प्रेमी विश्वेश्वर ने घर में संतान के पैदा होते समय भी पेड़ों को लगाया। इतना ही नहीं जब उनकी बेटी मंजू का विवाह हो रहा था तो कन्या दान के समय वह जंगल में पेड़ लगा रहे थे। गांव के लोगों ने काफी खोजबीन कर विवाह के कन्यादान की याद दिलायी। इससे साफ जाहिर होता है कि उनके रग-रग में पर्यावरण संरक्षण का कितना जुनून था।
 

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vishweshwar dutt saklani

उन्होंने हमेशा गांव में मांगलिक कार्यों में शिरकत करते समय लोगों को पेड़ बांटे। अब भले ही विश्वेश्वर  दत्त पंचतत्व में विलीन हो गए हों, लेकिन  उनकी याद में वृक्ष वंशावली वन में रविवार को पेड़ लगाया जाएगा। उनके पुत्र संतोष सकलानी ने बताया कि पिता की अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए वृक्ष वंशावली स्मृति वन में पेड़ लगाकर उनके पिता की स्मृति को संजोया जाएगा।  
 

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vishweshwar dutt saklani

चली गई थी आंखों की रोशनी 
अब इसे पर्यावरण संरक्षण का जुनून ही कहेंगे कि विश्वेश्वर दत्त सकलानी ने कभी भी अपने शरीर की परवाह नहीं की। सर्दी या ठंड हमेशा एक ही लक्ष्य पेड़ लगाना। ऐसे में अधिकांश समय जंगलों में धूल भरी मिट्टी के कारण उन्हें आई हैमरेज हो गया था। जिसके कारण उनके आंखों की रोशनी चली गई थी। बावजूद इसके पेड़ लगाने के प्रति उनकी लगन में कोई कमी नहीं आई।  

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