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रक्षाबंधन पर यहां आठ मिनट के 'पत्थर युद्ध' में दिखा हैरतअंगेज नजारा, देखिए रोमांचक तस्वीरें...

Mon, 27 Aug 2018 09:26 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला/ देवीधुरा (चंपावत)
न्यूज डेस्क/अमर उजाला/ देवीधुरा (चंपावत) Updated Mon, 27 Aug 2018 09:26 AM IST
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Stone war on Raksha Bandhan 2018 in devidhura Bagwal
devidhura

देवभूमि में देवीधुरा के बाराहीधाम स्थित खोलीखांण दुबाचौड़ा मैदान में रविवार को हैरतअंगेज नजारा दिखा। सुबह से लगातार तेज बारिश हो रही थी, लेकिन बगवाल (पत्थर युद्ध के नाम से प्रसिद्ध) से ठीक दो मिनट पहले बारिश थम गई और बगवाल खत्म होने के चार मिनट बाद फिर बारिश शुरू हो गई। शुरुआत में फल-फूलों से बगवाल खेली गई, मगर डेढ़ मिनट बाद पत्थर बरसने लगे। अपराह्न 2.38 बजे मंदिर के पंडित कीर्ति बल्लभ शास्त्री और भुवन जोशी की शंखध्वनि के साथ बगवाल का श्रीगणेश हुआ। बगवाल 8 मिनट तक चली। पिछले साल भी ठीक 8 मिनट ही बगवाल हुई। इस बार बगवाल में 112 बगवाली वीरों सहित कुल 241 लोग चोटिल हुए।



 

Stone war on Raksha Bandhan 2018 in devidhura Bagwal
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अलग-अलग रंग के साफे के साथ सजे धजे बगवाली वीरों का रंग-रूप देखते ही बनता था। आयोजन के मुख्य अतिथि केंद्रीय कपड़ा राज्यमंत्री अजय टम्टा, प्रदेश के उच्च शिक्षा राज्यमंत्री धन सिंह रावत थे। जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी राजेश कुमार का दावा है कि इस बार बीस हजार से अधिक लोग बगवाल के विहंगम नजारे के साक्षी बने। वहीं, बगवाल में करीब एक हजार लोगों ने शिरकत की। मैदान में प्रवेश करने से पूर्व सभी चारों खामों और सातों थोकों (चम्याल, गहरवाल, लमगड़िया, वालिग, गोरना, कटना और फुलाराकोट) के योद्धाओं ने मां वज्र बाराही के जयकारे लगाए।

Stone war on Raksha Bandhan 2018 in devidhura Bagwal
devidhura

वालिग खाम के बगवाली वीरों ने मुखिया बद्री सिंह (62) के नेतृत्व में रणक्षेत्र में दस्तक दी, जबकि गंगा सिंह चम्याल (73) के नेतृत्व में चम्याल खाम, वीरेंद्र सिंह लमगड़िया (38) के नेतृत्व में लमगड़िया खाम और त्रिलोक सिंह बिष्ट (89) के नेतृत्व में गहरवाल खाम के वीरों ने मैदान में प्रवेश किया। मां के जयकारों के साथ योद्धाओं ने व्रज बाराही के मंदिर की परिक्रमा की। इसके बाद चारों खामों के योद्धा अपने-अपने मोर्चे पर डट गए। 

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Stone war on Raksha Bandhan 2018 in devidhura Bagwal
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संकेत मिलते ही मंदिर वाले छोर में डटे वालिग खाम और लमगड़िया खाम ने फल-फूल बरसा कर बगवाल का श्रीगणेश किया, जबकि दूसरी तरफ से चम्याल और गहरवाल खाम के योद्धा मोर्चा संभाले हुए थे। पत्थर युद्ध के नाम से प्रसिद्ध बगवाल की शुरुआत नाशपाति, सेबों और फूलों से हुई, लेकिन बमुश्किल डेढ़ मिनट में ही फल खत्म हो गए। इसके बाद बगवाली वीरों ने पत्थर बरसाने शुरू कर दिए।

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Stone war on Raksha Bandhan 2018 in devidhura Bagwal
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मंदिर के पीत वस्त्रधारी पुजारी धर्मानंद ने अपरान्ह 2.46 बजे रणक्षेत्र में पहुंचकर चंवर झुलाकर बगवाल समाप्त होने का संकेत किया और बगवाल पर विराम लग गया। चारों खामों के योद्धाओं ने आपस में गले मिलकर एक दूसरे की कुशलक्षेम पूछी। सकुशल वापसी के लिए मां के आगे शीश नवाया। इस बार 112 बगवाली वीर और 129 दर्शक घायल हुए। घायलों का चिकित्सा शिविर में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.आरपी खंडूरी के नेतृत्व में आई डॉक्टरों की टीम ने इलाज किया।

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