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Shardiya Navratri 2023: हर क्षेत्र में बना रहीं मुकाम, ‘शक्ति’ स्वरूपा नारी को सलाम. पढ़ें इन महिलाओं की कहानी

Sun, 22 Oct 2023 05:31 PM IST
रेनू सकलानी माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Sun, 22 Oct 2023 05:31 PM IST
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Shardiya Navratri 2023: Women are making mark in every field Showing power from education health to home
प्रो. सुरेखा,  साधना शर्मा,  शिवानी भागवत - फोटो : amar ujala

राज्य की महिलाएं शिक्षा, स्वास्थ्य से लेकर घर-परिवार तक अपनी ‘शक्ति’ दिखा रही हैं। डॉ. सुरेखा डंगवाल जैसी महिलाएं देश ही नहीं विदेश तक में अपना और देश का नाम रोशन कर रही हैं। वहीं, कोई स्वास्थ्य के क्षेत्र में अच्छा काम कर रहा है, तो कोई संगीत। नवरात्र के अवसर पर अमर उजाला अपने पाठकों को उन महिलाओं के बारे में बता रहा है अलग-अलग क्षेत्रों में एक अलग मुकाम बनाया है।

विदेश के बच्चों को भी पढ़ाती हैं प्रो. सुरेखा

प्रो. डॉ. सुरेखा डंगवाल दून विश्वविद्यालय की कुलपति हैं। इसके साथ ही वह हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में अंग्रेजी, आधुनिक यूरोपीय और अन्य विदेशी भाषाओं के विभाग में प्रोफेसर हैं। 35 वर्षों के शैक्षिक अनुभव के दौरान विदेशों में भी छात्रों को शिक्षा देने का कार्य करती रही हैं। जर्मनी के कासल और हनोवर, जर्मनी में अंतर्राष्ट्रीय महिला विश्वविद्यालय में महिला अध्ययन पर फेलोशिप मिल चुकी है। प्रो. सुरेखा के 50 शोध-पत्र और तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।

कन्या भ्रूण हत्या रोकने को चलाया अभियान

उत्तरांचल महिला एसोसिएशन ‘’उमा’’ की अध्यक्ष साधना शर्मा महिलाओं के उत्थान के लिए कार्य कर रही हैं। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड नया राज्य बना तो पीसीपीएनडीटी एक्ट लागू नहीं था। यह एक्ट कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए होता है। इस एक्ट को लागू करने के लिए उनकी ओर से पोस्टकार्ड अभियान चलाया गया। मुख्यमंत्री, राज्यपाल और स्वास्थ्य मंत्री को अवगत करवाया। इसके बाद राज्य में पीसीपीएनडी एक्ट लागू हुआ।

शिवानी ने संगीत से बनाई पहचान

दून की शिवानी भागवत ने संगीत के हुनर पर अपनी पहचान बनाई है। वह उत्तराखंड के प्रसिद्ध पांडवाज ग्रुप की महत्वपूर्ण सदस्य हैं। उन्होंने कई मंचों पर अपने गीतों की धुन से लोगों को उत्तराखंडी संस्कृति से जोड़ने का काम किया है। शिवानी कई एलबम के गीतों में भी आवाज दे चुकी हैं। लोक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए शिवानी बॉलीवुड के बजाए उत्तराखंडी गीतों में ही अपनी आवाज का जादू बिखेरना चाहती हैं। वह विभिन्न राज्यों में सौ से अधिक शो में हिस्सा ले चुकी हैं।

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रूपा सोनी - फोटो : amar ujala

रूपा दे रहीं स्वस्थ जीवन शैली का संदेश
दून की रूपा सोनी अपनी रसोई से लोगों तक स्वस्थ जीवन शैली का संदेश दे रही हैं। उन्होंने कहा, कोरोनाकाल ने हम सभी को अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना सिखाया है। स्वह विभिन्न कार्यक्रमों में लोगों को स्वस्थ जीवन शैली के प्रति जागरूक करती हैं। रूपा अपनी रसोई में तरह-तरह के पौष्टिक भोजन बना उनके महत्व व उन्हें खाने का सही समय बताती हैं। इसके साथ ही वह लोगों को मोटे अनाज के महत्व के बारे में भी जानकारी दी रही हैं।

जीवन बचाने की पहल करती हैं दीप्ति दीप्ति 

हरिद्वार में ब्लड वालंटियर ग्रुप से जुड़कर मानव जीवन और मानवता को बचाने का प्रयास कर रहीं दीप्ति कुमार का प्रयास सार्थक सिद्ध हो रहा है। इन दिनों जब डेंगू की चपेट में आने से अनेक लोग अस्पताल में भर्ती हैं। लोगों को प्लेटलेट्स आसानी से मिल सके, इसके लिए दीप्ति कुमार की पहल पर लगभग सौ यूनिट रक्तदान हुआ। इसमें सिर्फ महिला रक्तदाताओं को शामिल किया गया। दीप्ति का प्रयास भी यही था कि रक्तदान के लिए महिलाओं की भी भागीदारी सुनिश्चित हो।

 

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डॉ. माधुरी और मनीषा - फोटो : amar ujala

डॉ. माधुरी दिखा रहीं उद्यमिता की राह
कोटद्वार के हल्दूखाता निवासी डॉ. माधुरी डबराल वर्मी कंपोस्ट तैयार कर किसानों और क्षेत्रवासियों को उद्यमिता और उन्नत खेती की राह दिखा रही हैं। माधुरी किसानों को रासायनिक उर्वरकों के दुष्परिणाम बताती हैं। इसके विकल्प में उन्हें वर्मी कंपोस्ट के उत्पादन और उपयोग बता रही है। पर्यावरण विज्ञान से एमएससी करने के बाद माधुरी ने गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार से प्रोस्पेक्ट ऑफ वर्मी कंपोस्ट इन उत्तराखंड विषय में पीएचडी की।

मातृशक्ति को समृद्ध बना रही हैं मनीषा

श्रीनगर में ग्राम पंचायत मरखोड़ा की ग्राम प्रधान मनीषा बहुगुणा मातृशक्ति व युवा पीढ़ी को स्वरोजगार के माध्यम से समद्ध बनाने में जुटी हैं। वह गांव में कौशल विकास के कार्यक्रम चला रही हैं। उन्होंने रीवर्स पलायन कर गांव को खुशहाल बनाने का बीड़ा उठाया है। अभी तक 25 महिलाएं प्रशिक्षण लेकर सिलाई सेंटर के माध्यम से अपनी आजीविका चला रही हैं। मनीषा का श्रीनगर में एक कंप्यूटर सेंटर था, जिसे छोड़कर वह गांव में महिलाओं व युवाओं की समृद्धि के लिए गांव लौट गई।

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पुष्पा मानस - फोटो : amar ujala

अपनों को खो चुके बच्चों की मदद कर रहीं पुष्पा

शिक्षा विभाग की पूर्व निदेशक पुष्पा मानस ने अपनों को खो चुके बच्चों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। वर्ष 2010 में शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्ति के बाद वर्ष 2014-15 में उन्होंने अपने मां और पिता के नाम से पार्वती देवी, गंगा राम भट्ट ट्रस्ट बनाकर ऐसे बच्चों की मदद का निर्णय लिया जो अपने माता-पिता को खो चुके हैं। पुष्पा के मुताबिक केदारनाथ आपदा में कई बच्चे अनाथ हो गए थे। उन्होंने ट्रस्ट बनाकर इस तरह के बच्चों के लिए एकमुश्त छात्रवृत्ति की योजना शुरू की।

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रोशन - फोटो : amar ujala

बेटे और पति की मौत के बाद भी नहीं हारी

रुड़की मेहवड खुर्द निवासी रोशन ने बेटे और पति की मौत के बाद भी हौसला नहीं खोया। परिवार पालने के लिए महिलाओं के कपड़े सिलाई कर आत्मनिर्भर बनने की ओर कदम बढ़ाए। रोशन के दो बेटे और एक बेटी थी। पांच साल पहले बेटे की मौत हो गई तो रोशन टूट गईं। हालांकि तब पति का सहारा था, लेकिन एक साल बाद ही पति ने भी साथ छोड़ दिया। ऐसे में दो बच्चों की जिम्मेदारी कंधे पर आ गई। इस दौरान हिम्मत हारने के बजाए रोशन ने महिलाओं के कपड़े सिलने शुरू किए।

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