केदारनाथ आपदा को हुए हालांकि चार साल का वक्त गुजरने को है। लेकिन इसके जख्म अभी भरे नहीं है। एसडीआरएफ को सर्च ऑपरेशन के दौरान केदारघाटी से सात और नर कंकाल मिले। इनका दाह संस्कार किया गया।
केदारनाथ आपदा को हुए बीते चार साल लेकिन अब भी मिल रहे कंकाल, तस्वीरों में देखें
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पांच आईपीएस अधिकारियों के नेतृत्व में पांच टीमों द्वारा चलाए गए दो दिवसीय कंकाल खोज अभियान (सर्च ऑपरेशन) के तहत केदारनाथ क्षेत्र में भैरवघाटी के समीप 7 नर कंकाल मिले हैं। पुलिस व एसडीआरएफ की टीम ने कंकालों का डीएनए सैंपल लेकर सोनप्रयाग में मंदाकिनी नदी के किनारे दाह संस्कार कर दिया है।
शासन के निर्देश पर पुलिस अधीक्षक रुद्रप्रयाग पीएन मीणा, पुलिस अधीक्षक चमोली तृप्ति भट्ट, पुलिस अधीक्षक उत्तरकाशी ददन पाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पौड़ी मुख्तार मोहसिन, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक टिहरी एनएस नपलच्याल के नेतृत्व में कालीमठ से जाल-चौमासी-खाम-रामाबाड़ा, चोराबाडी ताल से बेस कैंप और संपूर्ण केदारपुरी, केदारनाथ से सोनप्रयाग तक मुख्य मार्ग पर स्थित नए और पुराने स्थल, त्रियुगीनारायण-केदारनाथ और केदारनाथ से वासुकीताल तक पांच टीमों के 64 सदस्यीय दल ने कंकालों की खोज की।
16 मई की दोपहर को केदारनाथ से वासुकीताल ट्रेक पर भैरवनाथ मंदिर के पीछे की तरफ अलग-अलग स्थानों पर संबंधित टीम को सात नर कंकाल मिले। टीम में शामिल एसडीआरएफ के एसआई राम सिंह बोहरा ने बताया कि कुछ कंकाल एक ही जगह पर थे, जबकि अन्य अलग-अलग बिखरे हुए थे। जिस हाल में कंकाल मिले हैं, उससे लगता है कि ऑक्सीजन की कमी, भूख और प्यास से तब इन लोगों की मौत हुई होगी।
बता दें कि बीते वर्ष अक्तूबर में हिटो केदार अभियान के तहत ट्रेकिंग दल को त्रियुगीनारायण-केदारनाथ पैदल ट्रेक पर नर कंकाल मिले थे। तब शासन के निर्देश पर डीआईजी संजय गुंज्याल के नेतृत्व में चले विशेष रेस्क्यू में ट्रेकिं ग रूट पर 63 कंकाल मिले थे। तब तत्कालीन सीएम हरीश रावत ने यात्रा के दौरान पूरे क्षेत्र में एक बार कंकाल ढूंढने के लिए अभियान चलाने की बात कही थी, उसी के तहत यह अभियान चला था।