सावन के महीने में शिवरात्रि का विशेष महत्व माना गया है। इस वर्ष सावन माह की शिवरात्रि पर खास योग बन रहा है। इस दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी।
श्रावण शिवरात्रि आज, असमंजस में न पड़ें इस मुहूर्त में करें भोले का जलाभिषेक
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श्रावण माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि कहा जाता है। इस दिन त्रयोदशी तिथि भी है जो रात 10 बजकर 45 मिनट तक है। इसके बाद चतुर्दशी तिथि लग जाएगी। मध्यरात्रि में चतुर्दशी तिथि होने से शिवरात्रि भी बृहस्पतिवार को भी मानी जाएगी।
इस दिन रात्रि जागरण और शिवजी की पूजा को मोक्षदायिनी माना गया है। इसलिए सावन के महीने में ही भक्त सबसे ज्यादा कांवड़ चढ़ाते हैं। संयोग की बात यह भी है कि इस दिन गुरुवार है और पुष्य नक्षत्र भी लग रहा है। इससे गुरु पुष्य योग भी बना रहा है।
शिवरात्रि, त्रयोदशी और गुरु पुष्य योग, तीनों संयोगों के कारण इस साल सावन शिवरात्रि का खास महत्व है। इस दिन चंद्रमा का संचार मध्यरात्रि में कर्क राशि में होगा। इस समय शिवजी की पूजा से मानसिक बल बढ़ेगा। कुंडली में चंद्रमा की स्थिति अच्छी होगी। सावन में एक ही दिन जब इतने खास योग बन रहे हों, तब सुबह उठकर स्नानादि कार्यों से निवृत्त होकर शिवजी की पूजा करें। शिवरात्रि शिव और शक्ति के मिलन का दिन है। इसलिए शिवजी के साथ माता पार्वती की भी पूजा करनी चाहिए।
पूजा में शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भांग और फूल चढ़ाएं। कच्चा धागा लेकर शिव पार्वती के चारों ओर लपेटें और ओम नम: शिवाय मंत्र का जाप करें। इसके अलावा सावन मास में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन संध्या काल में शिवजी की पूजा और जलाभिषेक बहुत ही शुभ और फलदायी माना गया है। इस समय को प्रदोष काल माना गया है। इस समय भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं। इस समय शिवजी और देवी पार्वती की पूजा से मनोकामना पूरी होती हैं।