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पांच साल बाद उत्तराखंड में दिखा यह दुर्लभ पक्षी, आपको भी निहाल कर देगी इसकी खूबसूरती 

Mon, 10 Apr 2017 12:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Mon, 10 Apr 2017 12:38 PM IST
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 Satyar Tragopan found in Uttarakhand after five years

पांच साल की खोज के बाद आख‌िरकार मोनाल संस्था को उत्तराखंड में यह दुर्लभ पक्षी द‌िख ही गया। दुर्लभ सत्यर ट्रैगोपान पक्षी की खोजबीन में लगे मोनाल संस्था के सदस्यों को मंगलवार सुबह खलियाटॉप के बुग्यालों में यह नजर आ ही गया।

 Satyar Tragopan found in Uttarakhand after five years

सत्यर ट्रैगोपान को स्थानीय लोग लौंग नाम से जानते हैं, लेकिन कई वर्षों से यह पक्षी लोगों को नजर नहीं आया। बर्ड वाचिंग का काम कर रही मोनाल संस्था के सदस्य इस दुर्लभ पक्षी को कैमरे में कैद करने से बेहद खुश हैं।

 Satyar Tragopan found in Uttarakhand after five years

मोनाल संस्था के सचिव और प्रसिद्ध बर्ड वाचर सुरेंद्र पंवार ने बताया कि सत्यर ट्रैगोपान भारत, नेपाल और भूटान के हिमालयी क्षेत्र में पाया जाता है। गर्मियों में 8000 से 14000 फुट तक यह नजर आता है, जबकि शीतकाल में यह 6000 फुट तक भी पहुंच जाता है। 

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 Satyar Tragopan found in Uttarakhand after five years

उन्होंने बताया कि करीब 70 सेंटीमीटर ऊंचाई वाला यह पक्षी ज्यादातर बुरांश के घने जंगलों में रहता है। बेहद शर्मीले स्वभाव का यह पक्षी ज्यादा लंबी उड़ान नहीं भरता। उन्होंने बताया कि हिमालयी बुग्यालों में सत्यर ट्रैगोपान की संख्या कितनी है, इसका अंदाजा लगा पाना कठिन है, लेकिन इतना तय है कि इनकी संख्या अंगुलियों में गिनने लायक ही होगी।

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 Satyar Tragopan found in Uttarakhand after five years

उन्होंने बताया कि नर सत्यर ट्रैगोपान ज्यादा रंगीन होता है, जबकि मादा पक्षी गहरे भूरे रंग की होती है। उन्होंने कहा कि इस पक्षी के लिए खतरे बहुत ज्यादा हैं। शिकारियों के निशाने पर यह अक्सर आता रहता है। इनकी संख्या कम होने के पीछे का मुख्य कारण भी यही है। मोनाल संस्था के बृजेश धर्मशक्तू, पुष्कर आर्या, जगदीश भट्ट, वीरेंद्र दरियाल ने कहा कि इस पक्षी के संरक्षण के लिए वन विभाग के अधिकारियों से बात की जाएगी।

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