केदारनाथ और बदरीनाथ की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का परिधान देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। खास बात यह है कि प्रधानमंत्री के लिए यह खास परिधान उत्तराखंड के जौनसार बावर के विशेषज्ञ दर्जी रण सिंह ने तैयार किया था। जौनसार बावर के इस पारंपरिक परिधान को चोड़ा कहा जाता है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने देहरादून में इन्वेस्टर्स समिट के दौरान इसे प्रधानमंत्री को भेंट किया था।
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केदारनाथ धाम का नजारा देखते पीएम मोदी
- फोटो : फेसबुक
प्रधानमंत्री दो दिवसीय यात्रा के दौरान शनिवार को जब केदारनाथ गुफा में साधना करने गए और रविवार सुबह साधना करके वापस केदारनाथ मंदिर में दर्शन कर बद्रीनाथ जाने के लिए निकले तो उन्होंने जौनसार बावर का पारंपरिक परिधान भूरे रंग का चोड़ा पहना था। प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान ड्यूटी पर तैनात रहे उप निदेशक सूचना उत्तराखंड केएस चौहान ने इसकी पुष्टि की है।
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केदारनाथ धाम का नजारा देखते पीएम मोदी
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा रविवार सुबह पहना गया भूरे रंग का चोड़ा जौनसार बावर का पारंपरिक परिधान है। यह चोड़ा प्रधानमंत्री को अक्टूबर 2018 में देहरादून में हुए इन्वेस्टर्स समिट के दौरान मुख्यमंत्री ने भेंट किया था। चौहान ने बताया कि इस परिधान को उन्होंने चकराता के ग्राम ओडा निवासी विशेषज्ञ दर्जी रण सिंह से स्थानीय शुद्ध ऊन से तैयार कराया था।
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केदारनाथ धाम का नजारा देखते पीएम मोदी
- फोटो : फेसबुक
उल्लेखनीय है कि दशकों पूर्व जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे और चकराता क्षेत्र के दौरे पर आए थे, तब चकराता के तत्कालीन विधायक एवं उत्तर प्रदेश के मंत्री गुलाब सिंह ने उन्हें सफेद रंग का चोड़ा और बावरी टोपी पहनाई थी। स्थानीय अधिवक्ता क्षमा शर्मा, तरुण संघ खत लखवाड़ के पूर्व अध्यक्ष जितेंद्र सिंह चौहान, यशपाल सिंह चौहान आदि ने प्रधानमंत्री द्वारा अपनी धार्मिक यात्रा के दौरान जौनसार बावर क्षेत्र का पारंपरिक परिधान पहने जाने को क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बताया है।
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केदारनाथ धाम में पूजा करते पीए मोदी
- फोटो : एएनआई
चोड़ा जौनसार बावर क्षेत्र का पारंपरिक परिधान है। यह शुद्ध स्थानीय ऊन से बनाया जाता है। स्थानीय संस्कृति कर्मी एवं लोक कलाकार डॉ. भोपाल सिंह चौहान ने बताया कि पूर्व में चोड़ा क्षेत्र में अत्यधिक प्रचलित था। चोड़ा विशेषकर सर्दियों में पहने जाने वाला ऐसा परिधान है जो शरीर के लगभग पूरे हिस्से को ढककर सर्दी से बचाए रखता है। इसे दिन में पहनने के साथ ही रात को सोते समय भी शरीर पर कंबल की तरह लपेट कर रखने से ठंड से बचा जा सकता है। इसकी सिलाई इस तरह की जाती है कि इसे पहनकर सोने पर भी यह खराब नहीं होता।