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देहरादून: किशाऊ बांध परियोजना से पुश्तैनी जमीन पर संकट, महासू देवता की शरण में पहुंचीं महिलाएं, जानें वजह

Sat, 19 Sep 2026 06:22 PM IST
Renu Saklani संवाद न्यूज एजेंसी चकराता (विकासनगर)
संवाद न्यूज एजेंसी चकराता (विकासनगर) Published by: Renu Saklani Updated Sat, 19 Sep 2026 06:22 PM IST
सार

किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर प्रभावित गांवों में विरोध अब धार्मिक आस्था से भी जुड़ गया है। क्वानू की महिलाओं ने महासू देवता के दरबार में अर्जी लगाकर अपनी पुश्तैनी जमीन और आजीविका बचाने की गुहार लगाई।

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Kishau Multipurpose Dam Project Women Seek Mahasu Devta Blessings to Protect Ancestral Land After MoU Dehradun
महासू देवता मंदिर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर छह राज्यों के बीच 15 सितंबर को हुए समझौता ज्ञापन के बाद प्रभावित ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। शुक्रवार को क्वानू की महिलाएं महासू देवता मंदिर परिसर में एकत्र हुईं और परियोजना को लेकर सरकार को सद्बुद्धि देने की अर्जी लगाकर पुश्तैनी जमीन बचाने की गुहार लगाई।

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महासू देवता मंदिर परिसर में जुटीं ग्रामीण सुशीला, अंजू तोमर, नवमी तोमर, भवानों देवी, सज्जो देवी, सामो देवी, आंशिक तोमर और रीना तोमर आदि ने कहा कि समझौता ज्ञापन के बाद किशाऊ परियोजना के आगे बढ़ने का रास्ता साफ हुआ है। इससे प्रभावित परिवारों में विस्थापन, मुआवजा, पुनर्वास और आजीविका को लेकर चिंता बढ़ गई है।
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महिलाओं ने कहा कि परियोजना की आगे की कार्रवाई शुरू करने से पहले प्रभावित परिवारों के अधिकार स्पष्ट किए जाने चाहिए और उन्हें विश्वास में लिया जाना चाहिए।महिलाओं ने कहा कि क्षेत्र के ग्रामीणों की आजीविका कृषि, बागवानी और पशुपालन पर निर्भर है।
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परियोजना के चलते केवल जमीन ही नहीं, बल्कि ग्रामीणों की सामाजिक-सांस्कृतिक व्यवस्था और पुश्तैनी अधिकार भी प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण किसी भी कीमत पर अपनी पुश्तैनी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं हैं।महिलाओं ने केंद्र और प्रदेश सरकार से किशाऊ बांध परियोजना पर पुनर्विचार करने की मांग की। इससे पहले मंगलवार को क्वानू में ग्रामीणों ने परियोजना के विरोध में केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर पुतला दहन किया था।

 

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