प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बदरीनाथ-केदारनाथ पहुंचकर सांस्कृतिक समृद्धि का मंत्र फूंका। करोड़ों हिंदुओं की आस्था के प्रमुख केंद्रों पर पीएम ने सिर्फ हिंदुत्व का संदेश दिया, बल्कि भारत-चीन सीमा के पास बसे देश के अंतिम गांव माणा में सामरिक महत्व की दो सड़कों के चौड़ीकरण की योजना की आधारशिला रखकर उन्होंने चिर प्रतिद्वंद्वी चीन को भी संदेश दे दिया कि यह नया भारत है और अपनी सीमाओं की हिफाजत करना उसे अच्छे से आता है।
रोड कनेक्टिविटी से सीमांत गांवों के सन्नाटे को तोड़ वहां चहल-पहल पैदा करने के लिए उन्होंने देश के लोगों को सीमांत गांवों तक यात्रा करने की प्रेरणा देने की कोशिश की। देश के सीमांत गांवों को देश का अंतिम नहीं बल्कि प्रथम गांव पुकार कर उन्होंने अपनी सरकार की प्रतिबद्धता जाहिर की। वह विधानसभा चुनावों की तैयारी कर रहे हिमाचल और गुजरात का जिक्र करना भी नहीं भूले।
उन्होंने सीमांत गांवों के विकास के लिए पाकिस्तान की सीमा पर स्थित गुजरात के दो गांवों की मिसाल दी, जिनका उनकी सरकार में उद्धार हुआ था। उनका परिधान रहा हो या उनके शब्द बाण, जानकारों ने उनके पीछे के सियासी निहितार्थ भी टटोलने की भरपूर कोशिश की।
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माणा में प्रधानमंत्री मोदी
- फोटो : अमर उजाला
जानकारों का मानना है कि मोदी ने उत्तराखंड के जौनसार और हिमाचल के पारंपरिक परिधान चोला डोरा को पहनकर जहां पड़ोसी राज्य से अपना सांस्कृतिक जुड़ाव दिखाने का प्रयास किया वहीं एक तीर से कई निशाने साधे। जानकारों के मुताबिक, दक्षिण के दो राज्य तेलंगाना और कर्नाटक में भी विस चुनाव होने हैं।
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बातचीत करते प्रधानमंत्री मोदी
- फोटो : अमर उजाला
हालांकि इन दोनों राज्यों का पीएम ने प्रत्यक्ष तौर पर कोई जिक्र नहीं किया, लेकिन जिन दो धर्म स्थलों बदरीनाथ और केदारनाथ से उन्होंने हिंदुत्व का संदेश देने की कोशिश की, उनमें दोनों राज्यों के लोगों की अगाध आस्था है। दोनों ही स्थलों पर दक्षिण से सबसे अधिक श्रद्धालु आते हैं।
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प्रधानमंत्री पहुंचे केदारनाथ
- फोटो : एएनआई
सिखों के पवित्र स्थल हेमकुंड साहिब के लिए रोपवे के शिलान्यास के बहाने पीएम ने कहा कि ये रोपवे सिर्फ खंभे, तार मात्र नहीं हैं, इसके लिए कनाडा में उत्सव मनाया जाएगा।
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केदारनाथ में प्रधानमंत्री मोदी
- फोटो : अमर उजाला
पीएम मोदी ने एक बार फिर उत्तराखंड राज्य के मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी के संकल्प को दोहराकर सीएम धामी को राहत दी और उनकी तारीफ भी की। पीएम ने कहा कि उन्हें ईश्वर ने काम सौंपा है कि वे आस्था स्थलों का श्रद्धा के केंद्र बनाएं और वे पुराने गौरव को पुन: प्राप्त करें। दशकों तक आस्था के स्थलों के प्रति उपेक्षा के लिए उन्होंने पुरानी सरकारों को कोसा।
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