पीएम नरेंद्र मोदी को उत्तराखंड के इस उत्पाद से बनी ये अनोखी डिश खूब भा गई। मन की बात में उन्होंने देश के किसानों के लिए प्ररेणा का स्त्रोत भी बताया।
PM मोदी को भा गए मंडुवे के बिस्कुट, 'मन की बात' में जमकर की इस अनोखे प्रयास की तारीफ
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पहाड़ों में उत्पादित मोटे अनाज मंडुवा, चौलाई, मक्का व जौ से बिस्कुट बनाकर अपनी आर्थिकी को सुदृढ़ कर बागेश्वर जिला के मुनार गांव की महिलाओं ने आजीविका के लिए एक मिसाल पेश की है। मां चिल्ठा आजीविका सहकारिता समूह बनाकर गांव की महिलाओं ने पारंपरिक मोटे अनाज से प्रति माह 2000 पैकेट बिस्कुट तैयार कर रही हैं। इससे महिला समूह को सालाना 10 से 15 लाख की आमदनी प्राप्त हो रही है। रविवार को मन की बात में प्रधानमंत्री मोदी ने इन महिलाओं के प्रयासों की तारीफ कर इसे देश के किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत बताया।
बागेश्वर जिला के अंतर्गत कपकोट तहसील के मुनार गांव की महिलाओं ने एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना के तहत उत्तराखंड ग्रामीण विकास समिति के माध्यम से मां चिल्ठा सहकारिता समूह का गठन किया। इस समूह की महिलाओं ने गांव में ही बिस्कुट बनाने की फैक्ट्री लगाई। किसानों से मंडुवा, चौलाई, मक्का खरीदकर वेल्यू एडिशन के जरिये बिस्कुट तैयार किया। बाजार में बिस्कुट मार्केटिंग हिलांस ब्रांड के नाम से की जा रही है। एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना व अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास परिषद (आईफेड) की ओर से मार्केटिंग व पैकेजिंग में समूह के उत्पाद को पहचान दिलाई। बागेश्वर, गरुड़, कोसानी, अल्मोड़ा में बिस्कुट की मार्केटिंग के लिए आउटलेट खोले गए। इसके साथ ही प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों में भी मंडुवे व चौलाई से बने बिस्कुट की सप्लाई हो रही है। पहले जहां चौलाई 25 रुपये प्रति किलो बिकता था।
वहीं आज किसानों को 50 रुपये प्रति किलो दाम मिल रहे हैं। रविवार को मन की बात में प्रधानमंत्री मोदी ने मुनार गांव के महिलाओं के प्रयासों को देश के किसानों के लिए प्ररेणा स्रोत बताया। मोदी ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के किसान मंडुवा, चौलाई, मक्का व जौ उत्पादन करते हैं। लेकिन बाजार में उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। महिलाओं ने घाटा सहन न कर वेल्यू एडिशन कर अपने उत्पाद को बाजार में उतारा। मंडुवे में आयरन की मात्रा अधिक होने से गर्भवती महिलाओं के लिए ये बिस्कुट पोषाहार के समान है। प्रदेश के 50 आंगनबाड़ी केंद्रों में भी इन बिस्कुटों की सप्लाई की जा रही है। बिस्कुट कारोबार से महिलाएं सालाना 10 से 15 लाख की आय प्राप्त कर रही हैं। साथ ही 900 परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया। इससे गांव से पलायन रुकेगा।
उत्तराखंड ग्रामीण विकास समिति के माध्यम से महिला समूह का गठन कर उन्हें आजीविका की गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना के माध्यम से प्रदेश में 9810 उत्पाद समूह व 160 स्वायत्त सहकारिताओं का गठन किया गया। समूह के उत्पादों को पहचान दिलाने के लिए हिलांस ब्रांड के नाम से पैकेजिंग व मार्केटिंग की गई। प्रधानमंत्री द्वारा मन की बात में महिलाओं के उत्पाद की सराहना करना प्रदेश के लिए गौरव की बात है।
-डी. सेंथिल पांडियन, सचिव कृषि, मुख्य परियोजना निदेशक