इस बार गंगोत्री धाम की यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्रियों की यह तमन्ना अधूरी रह जाएगी। जानिए इसके पीछे की वजह...
इस बार गंगोत्री धाम आने वाले तीर्थयात्रियों की यह तमन्ना रह जाएगी अधूरी, जानिए वजह
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इस बार गंगोत्री धाम की यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्री चांगथांग ग्लेशियर का दीदार नहीं कर पाएंगे। सर्दियों में अपेक्षित बर्फबारी नहीं होने के कारण यह ग्लेशियर नहीं आया। बीते सालों में जांगला के पास गंगोत्री हाईवे को पार कर भागीरथी के आरपार तक पसरा रहता था चांगथांग ग्लेशियर। इसे काटकर बीच से तैयार सड़क पर यात्रा का रोमांच ही कुछ और होता था।
बता दें कि गंगोत्री यात्रा मार्ग पर धराली और जांगला के बीच आने वाला चांगथांग ग्लेशियर काफी विख्यात है। हर साल सर्दियों में हिमपात होने पर अमूमन जनवरी माह में आने वाला यह ग्लेशियर गंगोत्री हाईवे को पार कर गंगा भागीरथी के आरपार तक पसर जाता था।
गंगोत्री हाईवे का सौ मीटर हिस्सा करीब पचास फिट मोटाई वाले इस ग्लेशियर से पट जाता था। यात्रा सीजन शुरू होने से पहले बीआरओ इस ग्लेशियर को बीच से काटकर यहां वाहनों की आवाजाही लायक सड़क तैयार करता था।अप्रैल मई माह में यात्रा सीजन के दौरान बर्फ की 40 से 50 फिट ऊंची दीवारों के बीच से गुजरती सड़क पर यात्रा तीर्थयात्रियों को रोमांचित करती थी। तीर्थयात्री यहां रुककर बर्फ से खेलने और फोटोग्राफी कर ग्लेशियर की यादें सहेज ले जाते थे।
धराली निवासी शैलेंद्र पंवार, हर्षिल निवासी राजीव रावत आदि ने बताया कि इस बार सर्दियों में क्षेत्र में अपेक्षित बर्फबारी नहीं हुई। दिसंबर से अभी तक क्षेत्र में कुल चार बार हल्की बर्फ पड़ी है और वह भी मौसम खुलते ही पिघल रही है। सूरज की रोशनी से वंचित क्षेत्र में ही कुछ बर्फ जमा है। चांगथांग ग्लेशियर वाला हिस्सा बर्फविहीन पड़ा है।