जानकर शायद आपको यकीन न हो, लेकिन पहाड़ से मैदान में आए लोगों को घर वापस लौटने के लिए खुद देवता ने आदेश दिया। जिसके बाद लोगों ने घरवापसी की और आज पूरा गांव फिर से आबाद हो गया है। पढ़िए रोचक कहानी...
सुविधाओं के अभाव में वीरान हुआ चकराता ब्लॉक का मुंगाड़ गांव अब फिर से आबाद होने लगा है। इसके पीछे देवता के दोष से बचने के लिए लोगों के घर वापसी बड़ी वजह है। साथ ही सरकार के गांव में बिजली, पानी और स्कूल जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई है।
आजादी से पूर्व गांव में 60 परिवार रहते थे, लेकिन बिजली, पानी और स्कूल जैसी मूलभूत सुविधाएं गांव में न होने की वजह से यहां के अधिकांश परिवार पलायन कर दूरदराज के खेड़ों- मजरों में बस गए। गांव में सिर्फ बाजगी समुदाय के छह परिवार थे, लेकिन हाल ही में 10 परिवारों ने फिर से गांव में वापसी की है। कुछ परिवारों ने खंडहर हो चुके भवनों के जीर्णोद्धार का मन बनाया है।
पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य भगत सिंह चौहान, पंचम सिंह चौहान, दीनू दास आदि का कहना है कि गांव में कयलू और महासू देवता का मंदिर है। तीज त्योहारों पर ही लोग देवता की पूजा अर्चना के लिए गांव जाते थे, इसके चलते उन पर देवता का दोष लगने लगा।
ऐसे में देवता ने लोगों को फिर से गांव लौटने का आदेश दिया है। प्रधान केसर सिंह चौहान का कहना है कि लोगों की वापसी गांव के लिए शुभ संकेत है। यदि सभी परिवार लौट जाए तो गांव एक बार फिर से आबाद हो जाएगा।