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DNA टेस्टिंग में खुलासा, जड़ियों के नाम पर ऑनलाइन बिक रहे अंग

Mon, 18 Sep 2017 08:25 AM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 18 Sep 2017 08:25 AM IST
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online organ sale in the name of herbal jadi
organ

कई ऑनलाइन शापिंग साइट्स पर वाइल्ड लाइफ प्रॉडक्ट के नाम पर शेड्यूल वन प्राणियों के अंग बेचे जा रहे हैं।


 

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यह चर्चा कई बार उठी, मगर हाल ही भारतीय वन्य जीव संस्थान ने ऐसे कुछ प्रॉडक्ट की ऑनलाइन खरीद कर उनकी डीएनए जांच के बाद फर्जीवाड़े की पुष्टि की है। संस्थान ने अगली कार्रवाई के लिए संस्थान की ओर से नेशनल वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो को पत्र भेजा गया है।

 
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Forest Research institute, FRI
भारतीय वन्य जीव संस्थान की फोरेंसिक लैब प्रभारी वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. एसके गुप्ता और सीपी शर्मा ने हत्था जोड़ी जड़ी के सैंपल ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों से मंगाए थे। ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों को यह आर्डर लैब के तकनीकी अधिकारी सीपी शर्मा ने अपने नाम से और भारतीय वन्य जीव संस्थान के पते पर दिया था। 

 
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डीएनए टेस्ट लैब - फोटो : Getty
कंपनियों की साइट पर इसे हत्था जड़ी की फोटो के साथ दिखाया गया। जब आर्डर आ गया तो हत्था जोड़ी जड़ी की डीएनए टेस्टिंग की गई तो विज्ञानी चौंक गए। हत्था जोड़ी के स्थान पर नर मॉनीटर लिजर्ड (जिसे देसी भाषा में गोह कहते हैं) के जननांग निकले। विज्ञानियों का मानना है कि गोह का मांस कुछ लोग खाते भी हैं। जननांग ही बेकार बचता है।
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शोध - फोटो : फाइल फोटो
इसके अलावा ये हत्था जोड़ी जड़ी से मिलता-जुलता भी है। विज्ञानियों को चिंता इस बात की है कि जिस तरह से इस अंग की ऑनलाइन बिक्री हो रही है, इसका साफ मतलब है कि गोह की बड़े पैमाने पर पोचिंग की जा रही है।  

हत्था जोड़ी जड़ी के अलग-अलग ऑन लाइन कंपनियों को आर्डर दिए थे। इससे सात सैंपल मिले। पहले सोचा कि हो सकता है कि यह जड़ी ही हो, लेकिन जब इसकी डीएनए जांच की गई तो नर गोह के जननांग निकले। आर्डर संस्थान के पते पर ही मंगाए गए थे।  कार्रवाई के लिए नेशनल वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो को पत्र भेज दिया गया है।
- डॉ. संदीप कुमार गुप्ता, वरिष्ठ विज्ञानी एवं फोरेंसिक लैब इंचार्ज, भारतीय वन्य जीव संस्थान 
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