माता-पिता ने इस उम्मीद से नवोदय विद्यालय में एडमिशन कराया था कि मेरा भविष्य संवरेगा, लेकिन यहां तो भरपेट भोजन ही नहीं मिल रहा। भूख लगती है, तो बिस्किट खाता हूं... ये शब्द राजीव गांधी नवोदय विद्यालय मालतोली में पढ़ रहे छात्र के हैं।
नवोदय विद्यालय में बच्चों को बुरा हाल, देखिए किस तरह बिस्किट खाकर जिंदा हैं बच्चे
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शासन की ओर से विद्यालय को प्रति छात्र के हिसाब से प्रतिदिन 75 रुपये मिल रहा है, बावजूद बच्चों को भरपेट भोजन नहीं दिया जा रहा है। वर्ष 2012 संचालित राजीव गांधी नवोदय विद्यालय में 82 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। शनिवार को अमर उजाला संवाददाता विद्यालय पहुंचे, तो बच्चों ने बताया कि उन्हें स्कूल में भरपेट भोजन तक नहीं दिया जा रहा है।
नाश्ता तो कुछ हद तक ठीक रहता है, लेकिन दोपहर और रात के भोजन में उन्हें दो रोटी और डेढ़ करछी चावल दिया जा रहा है। कई को तो चावल भी नहीं मिल पाता है। शिकायत करने पर कैंटीन इंचार्ज डांटते हैं। प्रधानाचार्य को भी बताया, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
विद्यालय परिसर में गंदगी का अंबार है। टायलेट व बाथरूम की सफाई भी भगवान भरोसे है। स्थिति यह है कि अब बच्चे डीएम से समस्या बताने का मन बना चुके हैं। खुलने के बाद से विद्यालय समाज कल्याण विभाग के भवन पर चल रहा है।
विद्यालय में प्रधानाचार्य सहित शिक्षकों के 13 पद खाली चल रहे हैं। पठन-पाठन की व्यवस्था बीएमसी (विद्यालय प्रबंधन समिति) द्वारा मानदेय पर रखे नौ शिक्षकों के भरोसे चल रही है।
खराब भोजन परोसने और भरपेट नहीं देने की शिकायत बच्चों ने की थी। इस संबंध में हॉस्टल वार्डन और प्रधानाचार्य को अवगत करा दिया था।
- माणिक लाल, पीटीए अध्यक्ष, राजीव गांधी नवोदय विद्यालय मालतोली