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ऊर्जा प्रदेश बनेगा उत्तराखंड: 1320 मेगावाट से खत्म होगा बिजली संकट; जल्द शुरू होगी बड़ी योजना

Wed, 26 Aug 2026 01:07 AM IST
Alka Tyagi अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Alka Tyagi Updated Wed, 26 Aug 2026 01:07 AM IST
सार

अदानी को 25 साल तक के लिए ये काम सौंपा गया है। ऐतिहासिक आईने से देखें तो टीएचडीसी के बाद पहली बार 1320 मेगावाट का प्रोजेक्ट राज्य को मिलने जा रहा है।

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Uttarakhand Set to Become an Energy Hub1320 MW Capacity to End Power Crisis
- फोटो : AdobeStock

विस्तार

कोल आधारित बिजली संयंत्र से जहां राज्य में बिजली का संकट खत्म होगा, वहीं उत्तराखंड, ऊर्जा प्रदेश बनेगा। राज्य गठन के बाद अब टीएचडीसी की सीधे 1320 मेगावाट बिजली की आपूर्ति की बड़ी योजना शुरू होगी। अदानी पावर अपने खर्च पर जमीन, प्लांट, कोयला जुटाएगा और राज्य को 5.746 रुपये प्रति यूनिट की दर पर 25 साल तक बिजली आपूर्ति करेगा।

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यूपीसीएल की 1320 मेगावाट की कोल आधारित बिजली परियोजना के लिए राज्य को पूर्व में ही केंद्र से कोल ब्लॉक आवंटन हो चुका है। छत्तीसगढ़ में यह कोयला उपलब्ध होगा। यूपीसीएल ने नियामक आयोग की मंजूरी के बाद इसका टेंडर जारी किया था, जिसमें न्यूनतम बोलीदाता अदानी पावर आया। अदानी पावर इस प्रोजेक्ट को छत्तीसगढ़ में स्थापित करेगा। इसके लिए खुद जमीन खरीदकर प्लांट लगाएगा। कोयले की खरीद भी खुद करेगा। इसके लिए यूपीसीएल उसे प्रति यूनिट 5.746 रुपये का भुगतान करेगा।
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अदानी को 25 साल तक के लिए ये काम सौंपा गया है। ऐतिहासिक आईने से देखें तो टीएचडीसी के बाद पहली बार 1320 मेगावाट का प्रोजेक्ट राज्य को मिलने जा रहा है।

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यूपीसीएल के आकलन में वर्ष 2030-31 में लगभग सभी महीनों में 446 मेगावाट से 1311 मेगावाट तक बिजली की कमी रहेगी। इस दौरान तक 1320 मेगावाट की आपूर्ति शुरू हो जाएगी। इससे उत्तराखंड ऊर्जा में सरप्लस राज्य बन जाएगा।

हाइड्रो और सोलर से बेहतर है थर्मल का विकल्प
हाइड्रो पावर प्लांट में बिजली उत्पादन नदियों में पानी के बहाव पर निर्भर करता है। सर्दियों में बर्फबारी के कारण और बरसात में सिल्ट आने के कारण ये उत्पादन प्रभावित होता है। वहीं, सोलर प्लांट में केवल दिन के समय ही बिजली उपलब्ध होती है। लिहाजा, थर्मल पावर प्लांट इस मामले में फायदे का सौदा है। पीक आवर में भी इससे आसानी से बिजली आपूर्ति हो सकेगी।

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