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अमर उजाला एक्सक्लूसिव: निर्भया के इंसाफ की खबर सुन नम हुईं इलाज करने वाले डॉक्टर की आंखें, बोले...
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Tue, 07 Jan 2020 11:46 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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16 दिसंबर 2012 की रात को देश की एक बेटी के साथ हुई दरिंदगी के बाद उसका इलाज करने वाले डॉक्टर हालत देखकर अंदर तक दहल गए थे। आज निर्भया के दरिंदों को फांसी की सजा होने की बात सुनकर उसका इलाज करने वाले डॉक्टर विपुल कंडवाल खुश हैं। उनका कहना है कि दिल भारी है, लेकिन सुकून है कि बेटी को इंसाफ मिला।
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अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि निर्भया की हालत को देखकर वे बहुत दहल गए थे। आज भी उस वीभत्स घटना के जख्म मन को कचोटते हैं। दरिंदों को फांसी की सजा मिलने से उनके मन को सुकून मिला है। निर्भया जहां भी होगी उसकी आत्मा को भी शांति मिली होगी। अमर उजाला से उस वीभत्स दृश्य की याद साझा करते हुए डॉ. कंडवाल भावुक भी हो गए।
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16 दिसंबर 2012 की रात लगभग 1:30 बजे वे सफदरजंग अस्पताल में नाइट ड्यूटी पर थे। तभी सायरन बजाती तेज रफ्तार से एंबुलेंस अस्पताल की इमरजेंसी के बाहर आकर रुकी। घायल को तत्काल इमरजेंसी में इलाज के लिए पहुंचाया गया। एंबुलेंस से जिसे लाया गया था वह करीब 21 साल की एक युवती थी। उसके सारे कपड़े फटे थे। लगातार खून निकल रहा था।
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निर्भया की स्थिति उसके साथ हुई हैवानियत को बता रही थी। उसकी हालत को देखकर हम दहल गए। हमने पूरी कोशिश की थी उसे बचाने की। उसका खून रुक ही नहीं रहा था। उसकी आंते अंदर तक बहुत डैमेज हो गई थीं। ऐसा केस अपनी जिदंगी में पहले कभी नहीं देखा। कुछ देर में ही बड़ी संख्या पुलिस और मीडियाकर्मियों के वाहन भी अस्पताल पहुंचने लगे।
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अमर उजाला से बातचीत करते हुए डॉ. कंडवाल बेहद ही भावुक होकर कहते हैं कि पूरी सर्जिकल, इमरजेंसी और आईसीयू की टीम उसे बचाने की कोशिश में लगी थी। तीन चार बार उसकी सर्जरी भी की गई, लेकिन आंतें अत्यधिक डैमेज हो जाने से उसे बचाना बहुत मुश्किल हो रहा था। ऐसी कोई टेक्नालॉजी नहीं थी कि उसे बचाया जा सकता। उसे एक हफ्ते के बाद बेटर इलाज के लिए एयर एंबुलेंस से सिंगापुर भेजा गया।
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