दून की हरियाली पर फिदा थे निदा, कहते थे सितारों का शहर
अपनी शायरी और गीतों में जिंदगी के हर रंग शामिल करने वाले द को दून की हरियाली बेहद पसंद थी। दून के प्रसिद्ध सांस्कृतिक कार्यक्रम विरासत में जब भी वह प्रस्तुति देने आते थे तो दून को सितारों वाला शहर कहते थे।
दून की हरियाली पर फिदा थे निदा, कहते थे सितारों का शहर
उनसे नजरें क्या मिलीं रोशन फिजाएं हो गईं, आज जाना प्यार में जादूगरी क्या चीज है... जैसे गीतों की रचना करने वाले मशहूर शायर निदा फाजली का सोमवार को निधन हो गया।
दून की हरियाली पर फिदा थे निदा, कहते थे सितारों का शहर
वह दो बार विरासत में प्रस्तुति दे चुके हैं। इस साल अप्रैल में वह दून आने वाले थे, लेकिन अब ऐसा हो नहीं पाएगा। शायद ऐसे हालात के लिए ही उन्होंने लिखा है कि कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता, कभी जमीं तो कभी आसमां नहीं मिलता...
दून की हरियाली पर फिदा थे निदा, कहते थे सितारों का शहर
निदा फाजली को बच्चों से बेहद प्यार था। तभी तो उन्होंने लिखा है कि ‘घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूं कर लें, किसी रोते हुए बच्चे को हंसाया जाए’। निदा को सम्मानित करने वाली दून की संस्था शैलेंद्र मेमोरियल ट्रस्ट के इंद्रजीत सिंह ने बताया कि बच्चों के प्यार के चलते ही वह इस साल अप्रैल में दून आने वाले थे।
दून की हरियाली पर फिदा थे निदा, कहते थे सितारों का शहर
इंद्रजीत सिंह केवि-एक में प्रधानाचार्य हैं। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने निदा को बच्चों के बीच स्कूल में आने का न्योता दिया तो उन्होंने झट स्वीकार कर लिया। सिंह ने बताया कि फाजली कहते थे कि शायरी बच्चों के बीच की जानी चाहिए, ताकि उनमें कुछ संस्कार आएं।