नोटबंदी के बाद नए नोटों के बदले हुए साइज की वजह से देशभर के दृष्टिबाधित परेशान थे। उन्हें 2000 रुपये का नोट 20 और 500 का नोट 10 रुपये का प्रतीत हो रहा था।
इस डिवाइस से दृष्टिबाधित अब आसानी से पहचान सकेंगे नए नोट
इस समस्या के हल के लिए राष्ट्रीय दृष्टिबाधितार्थ संस्थान (एनआईवीएच) ने करेंसी आइडेंटिफायर डिवाइस तैयार की है। जल्द ही डिवाइस का प्रोडक्शन शुरू होने जा रहा है।
एनआईवीएच में वरिष्ठ अनुसंधान अधिकारी मनीष वर्मा ने बताया कि देशभर के दृष्टिबाधितों को नए नोटों को पहचानने में दिक्कत हो रही थी। नए नोटों में पहली बार नोटों के साइज की परंपरा टूटी है।
लिहाजा, दृष्टिबाधितों के लिए नए नोट को पहचानना वाकई चुनौती था। इससे निपटने के लिए ही उन्होंने करेंसी आइडेंटिफायर डिवाइस तैयार की है। यह ऐसी डिवाइस है, जिस पर नोट रखकर उसके साइज के हिसाब से ही यह पता चल जाता है कि वह कितने रुपये का नोट है।
इस डिवाइस में न केवल 500 और 2000 रुपये के नए नोट बल्कि पुराने नोटों की भी पहचान आसान है। एनआईवीएच की निदेशक डा. अनुराधा ने बताया कि डिवाइस को प्रोडक्शन में लाने की प्रक्रिया जल्द शुरू होने वाली है। इसकी कीमत अभी तय नहीं हुई है, लेकिन यह बेहद सस्ती रखी जाएगी।