नागपंचमी का पर्व शनिवार को मनाया जा रहा है। नागपंचमी पर शेषनाग और नागों की मूर्तियों का दूध से अभिषेक किया जाता है। नागों की पूजा से भगवान शिव को प्रसन्न किया जा सकता है।
आचार्य देवेंद्र प्रसाद भट्ट ने बताया कि नागपंचमी की पूजा को भगवान श्रीकृष्ण से भी जोड़कर देखा जाता है। कालिया नाग पर श्रीकृष्ण की विजय को नागपंचमी के रूप में मनाया जाता है।
भगवान शिव नागों से स्नेह रखते हैं, इसलिए नागों के प्रतीकों की विधिपूर्वक पूजा करने से भगवान शिव को प्रसन्न किया जा सकता है। पुराणों के अनुसार जिन जातकों की कुंडली में कालसर्प दोष हो वह इस दिन पूजा करें। इससे उन्हें लाभ मिलेगा।
नागपंचमी का व्रत करने से सांपों का भय दूर होता है। इस दिन सोना, चांदी, तांबा, पीतल आदि से धातुओं से निर्मित नागों का पूजन करनी चाहिए।
आचार्य भट्ट ने नागपंचमी की पूजा विधि बताते हुए कहा कि स्नान कर घर के दरवाजे और पूजा के स्थान पर गोबर से नाग बनाएं। व्रत में लेकर नाग देवता का आसन के लिए आह्वान करें। जल, पुष्प, चंदन का अर्घ्य दें। दूध, दही, घी, शहद और चीनी का पंचामृत बनाकर नाग प्रतिमा को स्नान कराएं। नाग देवता को सुगंध प्रिय है।