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Mussoorie: आज भी लोगों के सूखे हलक तर कर रहा 194 साल पुराना ये कुआं, इसलिए कहते हैं इसे विशिंग वेल

Mon, 01 Aug 2022 04:04 PM IST
अलका त्यागी सुनील रमेश सिलवाल, अमर उजाला, मसूरी
सुनील रमेश सिलवाल, अमर उजाला, मसूरी Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 01 Aug 2022 04:04 PM IST
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Mussoorie: Interesting facts About 194 year old wishing well in hathipaon
मसूरी में कुआं - फोटो : अमर उजाला

‘मेरी उम्र 194 साल है, पर ख्वाहिश अभी मरी नहीं है। अब भी मैं सूखे हलक को तर करने का काम करता हूं। कोई भी प्यासा मेरे पास आता है, मैं उसको बिन पानी तड़पने नहीं देता है। हां! इस वक्त मैं तो ठीक हूं, लेकिन मेरी बाह्य दशा को मुलाजिमों ने जीर्णशीर्ण स्थिति में पहुंचा दिया है। फिर भी लोगों की प्यास बुझाने का जज्बा कम नहीं हुआ है और मैं अपने काम को बिना लागलपेट के निरंतर किए जा रहा हूं।’



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उपरोक्त जज्बा और दर्द मसूरी के हाथीपांव के उस ऐतिहासिक 194 साल पुराने कुएं के हैं, जो बोल तो नहीं सकता, लेकिन दशा देखकर उसकी पीड़ा को बखूबी समझा जा सकता है। निर्जीव होेने के बावजूद जीवितों की प्यास बुझा रहा है, लेकिन अफसरों और कर्मियों की बेरुखी से जीर्णशीर्ण हालत में पहुंच गया है।

अमूमन पहाड़ों में पानी के कुएं इतनी ऊंचाई पर नहीं होते है, लेकिन मसूरी में ऐतिहासिक कुआं है, जो पानी देने के बावजूद अपनी जीर्णशीर्ण दशा पर आंसू भी बहा रहा है। अब इसमें धीरे-धीरे पहले के मुकाबले पानी भी कम हो रहा है। प्रदेश के सभी हिल स्टेशनों में संभवतया: यह पहला कुंआ है, जो इतनी ऊंचाई पर अंग्रेजों ने बनाया था।  

Mussoorie: Interesting facts About 194 year old wishing well in hathipaon
मसूरी में कुआं - फोटो : अमर उजाला

कुएं में भले ही पहले के मुकाबले पानी कम हो गया हो, लेकिन आज भी आसपास के लोग इसके पानी पर निर्भर हैं। हाथीपांव, जॉर्ज एवरेस्ट, क्लाउड एंड, दूधली समेत आसपास आने वाले पर्यटक कुएं को देखने जरूर आते हैं। इसे लेकर शहर के पुराने लोगों में कई मान्यताएं भी प्रचलित हैं। कहा जाता है कि कुएं में पीछे मुड़कर कोई सिक्का या अंगूठी डालेगा, तो उसकी मनोकामना पूरी होती है। आज भी कई लोग क्षेत्र में जब घूमने आते हैं, तो कुएं में सिक्का जरूर डालते हैं। इससे कुएं का नाम विशिंग वेल भी पड़ गया है। 

Mussoorie: Interesting facts About 194 year old wishing well in hathipaon
मसूरी में कुआं - फोटो : अमर उजाला

1828-29 में तत्कालीन अंग्रेज जनरल विश ने मसूरी के हाथीपांव में पानी न होने पर सात हजार फीट की ऊंचाई पर कुएं का निर्माण कराया था। शहर में पानी की कमी से भले ही लोग परेशान रहते हों, लेकिन कुएं के आसपास के लोगों को इससे लगातार पानी मिल रहा है।

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Mussoorie: Interesting facts About 194 year old wishing well in hathipaon
मसूरी में कुआं - फोटो : अमर उजाला

हाथीपांव क्षेत्र में लगातार आबादी बढ़ने और वन क्षेत्र कम होने का असर कुएं के पानी पर भी देखने को मिल रहा है। पहले के मुकाबले पानी कम हो गया। बुजुर्ग रूप सिंह कठैत बताते हैं कि आज भी आसपास के लोग इसी कुएं से प्यास बुझा रहे हैं। दुख जताया कि ऐतिहासिक महत्व के कुएं का उचित रखरखाव न होने से इसकी हालत दयनीय होती जा रही है।

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मसूरी में कुआं - फोटो : amar ujala

क्षेत्र में पानी की कमी दूर करने के लिए अंग्रेज जनरल विश ने कुएं का निर्माण कराया था। सर जार्ज एवरेस्ट ने भी कुएं के पानी का इस्तेमाल किया था। आज भी यह लोगों की प्यास बुझा रहा है, लेकिन रखरखाव न होने से इसकी हालत जहां जीर्णशीर्ण होने लगी है तो वहीं पानी भी कम होता जा रहा।
- गोपाल भारद्वाज, इतिहासकार

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