आध्यात्मिक साधना के लिए समर्पित मौनी अमावस्या आज है। जिसके लिए भक्त तड़के से ही हरिद्वार के विभिन्न घाटों पर स्नान, दान और पूजन कर रहे हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मुनि शब्द से ही मौनी की उत्पत्ति हुई है। मौनी अमावस्या का उद्देश्य यही है कि इस दिन गंगा स्नान के साथ दिनभर मौन व्रत रखकर मन को संयमित रखकर ईश्वर को स्मरण करने से आंतरिक ऊर्जा बढ़ने के साथ ही पुण्य फल मिलता है।
Mauni Amavasya 2020: 382 सालों के बाद बने योग में गंगा स्नान से मिलेगा पुण्य
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सनातन परंपरा में माघ को अत्यंत पवित्र मास कहा गया है। माघ अमावस्या को मौनी अमावस्या भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन गंगा का जल अमृत बन जाता है। इसलिए इस दिन गंगा स्नान और दान-पुण्य का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार माघ मास में पूजन-अर्चन और गंगा स्नान करने से भगवान नारायण को प्राप्त किया जा सकता है।
इस दिन मौन व्रत रखकर मन को संयम रखने का विधान है। इसलिए इस दिन व्रती को मौन धारण करते हुए दिनभर मुनियों सा आचरण करना पड़ता है। ज्योतिष में सूर्य को आत्मा और चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। क्योंकि मन को चंद्रमा की तरह चंचल बताया गया है। मन को नियंत्रित करने के बाद ही साधना क्षेत्र में आगे बढ़ा जा सकता है।
ऐसे में मन पर नियंत्रण रखने के लिए इस दिन मौन रखकर गंगा स्नान करने का विधान है। इससे शरीर की सकारात्मक ऊर्जा भी बढ़ती है। इस साल मौनी अमावस्या आज यानी 24 जनवरी को ब्रह्म मुहूर्त से पहले सुबह 2.17 बजे से शुरू होकर 25 जनवरी को सुबह 3.11 बजे पर समाप्त होगा। आचार्य सोहन का कहना है कि मौनी अमावस्या पर मौन रहकर गंगा स्नान किया जाना चाहिए।
शिव शक्ति ज्योतिष केंद्र के अध्यक्ष आचार्य पंडित रमेश सेमवाल ने बताया कि 24 जनवरी में विशेष योगों में शनि का राशि परिवर्तन हो रहा है। उन्होंने कहा कि माघ कृष्ण पक्ष मौनी अमावस्या को शनि, मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं। यह योग 382 सालों के बाद बन रहा है। इससे पहले यह योग 26 जनवरी 1637 में बना था। जब मौनी अमावस्या में शनि ने परिवर्तन किया था।