ऋषिकेश में रानीपोखरी के नागाघेर में महेश तिवारी ने हैवानियत की सारी हदें पार करते हुए अपनी बुजुर्ग मां बीतन देवी, पत्नी नीतू और तीन बेटियों अपर्णा, स्वर्णा और अन्नपूर्णा की बेरहमी से गला रेतकर हत्या कर दी थी। महेश के छोटे भाई नरेश ने नम आंखों और कांपते हाथों से सभी शवों को मुखाग्नि दी।
अंधविश्वास ने बनाया हैवान: पिता काटता रहा एक-एक कर सबके गले, मासूम की चीखें सुन पहुंचे पड़ोसी मंजर देख कांपे
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घर के बाहर मेन गेट पर भी हमेशा ताला लगा रहता था। पड़ोसियों के अनुसार अंधविश्वास के कारण ही वह तंत्र-मंत्र करने लगा था और इसी अंधविश्वास ने उसे हैवान बना दिया। उसे पहले खून देखकर डर लगता था। कई बार वह इस बारे में बात किया करता था।
उन्होंने पति सुबोध को अन्नपूर्णा को देखने के लिए भेजा। जब सुबोध ने खिड़की से देखा तो महेश छोटी बेटी को काबू करने का प्रयास कर रहा था। लेकिन, फिर खून से सने हाथों से महेश ने खिड़की बंद कर दी।
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इसके बाद अन्नपूर्णा ने दूसरी खिड़की खोलने का प्रयास किया लेकिन वह आधी ही खुली। जब पड़ोसी ने भीतर देखा तो महेश अपनी बेटी का गला रेत रहा था।