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पेयजल योजना में गबन: पूर्व अध्यक्ष-कोषाध्यक्ष को सजा
Sun, 23 Aug 2026 02:52 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
Updated Sun, 23 Aug 2026 02:52 AM IST
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चकराता न्यायिक मजिस्ट्रेट आकाश कुमार की अदालत ने खमाशा पेयजल योजना में सरकारी धन के गबन और धोखाधड़ी के मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने उपभोक्ता पेयजल उप-समिति के तत्कालीन अध्यक्ष देवी लाल (निवासी दोऊ, तहसील कालसी) और तत्कालीन कोषाध्यक्ष बारू सिंह (निवासी झूसौ, चकराता) को दोषी करार दिया है। अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अध्यक्ष को तीन वर्ष और कोषाध्यक्ष को दो वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है।अभियोजन के अनुसार, वित्त वर्ष 2011-12 में खमाशा पेयजल योजना 7.509 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत हुई थी। इसके निर्माण के लिए उपभोक्ता पेयजल उप-समिति को दो किस्तों में कुल 5.94 लाख रुपये का भुगतान किया गया था। लेकिन, जब विभाग ने मौके पर जांच की तो केवल 3.063 लाख रुपये का ही काम मिला। शेष 2,87,522 रुपये का न तो कोई हिसाब दिया गया और न ही यह धनराशि वापस लौटाई गई। इस फर्जीवाड़े पर जल निगम के तत्कालीन अधिशासी अभियंता सोहित कुमार ने देवी लाल और बारू सिंह के खिलाफ सरकारी धन के दुरुपयोग और धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया था।मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से नौ गवाह पेश किए गए। न्यायालय ने मौके पर हुए कार्य और खर्च की गई धनराशि के बीच के भारी अंतर को गबन का मुख्य आधार माना। शेष सरकारी धन का समायोजन न होने तथा गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी पाया। न्यायालय ने देवी लाल को तीन वर्ष के साधारण कारावास व 10 हजार रुपये अर्थदंड और बारू सिंह को दो वर्ष के साधारण कारावास व 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। सुनवाई के दौरान अदालत के संज्ञान में यह तथ्य भी आया कि आरोपी देवी लाल ने जमानत के दौरान 1,43,761 रुपये की धनराशि जमा कराई थी।
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