नए साल 2020 का राजा बुध ग्रह होगा। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक बुध के अधिपति होने के कारण इस साल धर्म और अध्यात्म का बोलबाला होगा। यही नहीं आने वाले साल में भारत तकनीक और अंतरिक्ष के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करेगा। आजाद भारत की गणना के आधार पर इस साल विदेश नीति में देश इस साल और भी मजबूत बनकर उभरेगा।
ज्योतिषाचार्य डॉ. सुशांत राज ने बताया कि इस साल बुधवार का एक संयोग भी हो रहा है। यह संयोग यह है कि अंग्रेजी नया साल भी बुधवार से शुरू हो रहा है और गुड़ी पड़वा से शुरू होने वाला विक्रमी संवत्सर भी बुधवार के दिन से ही शुरू हो रहा है। पूरे साल में 63 बुधवार होंगे। इनमें से वर्ष में आने वाले 53 बुधवार में खासकर रवि, अमृत सिद्धि व सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है।
साल में आने वाले प्रमुख व्रत और त्योहार भी बुधवार को ही हैं। वर्ष की अंक गणना से भी यह साल उन्नति व प्रगति देने वाला होगा। वर्ष का आरंभ कन्या लग्न में रहेगा और इस राशि का स्वामी भी बुध ही है। इसके साथ ही ग्रह गोचर में पांच ग्रह क्रमश: सूर्य, बुध, गुरु, केतु व शनि का धनु राशि पर होगा और बुध व गुरु का केंद्र योग बनाते हुए वर्गोत्तम होना इस बात की साक्षी है। नए साल में भारतीय जीवन में व्यावसायिकता और आध्यात्मिकता कर प्रभाव रहेगा।
डॉ. सुशांत के मुताबिक साल 2020 में सबसे बड़े ग्रह का सबसे बड़ा परिवर्तन होगा। उन्होंने बताया कि 30 मार्च को बृहस्पति अपनी स्वराशि धनु से नीच राशि मकर में प्रवेश करेंगे, लेकिन इसके बाद 30 जून को वक्री होकर धनु राशि में आ जाएंगे। 20 नवंबर को बृहस्पति वापस मकर राशि में संचरण करेंगे। ज्योतिष में बृहस्पति को शुभ ग्रह माना जाता है। यह ज्ञान, धर्म, आध्यात्म और नैतिक कार्यों का कारक है।
एक जनवरी 2020 का पूर्णांक छह आता है। अंक शास्त्र की गणना से देखे तो छह अंक पर शुक्र का प्रभुत्व रहता है। नवग्रहों में शुक्र सौंदर्य, समृद्धि, ऐश्वर्य, मनोरंजन, सफलता और नवाचार का कारक ग्रह माना जाता है। इस दृष्टि से वर्ष 2020 हर्ष के साथ शुक्र कारक ग्रह साबित होगा। नया साल अंतरिक्ष, विज्ञान, वैश्वीकरण, सोलर एनर्जी, योग साधना, प्राचीन विद्या, प्रागैतिहासिक सिद्धांत शैली को अपनाने वाला रहेगा।