मकर संक्रांति के साथ ही 14 जनवरी से खरमास समाप्त हो जाएगा। अक्सर खरमास के समापन के साथ ही मांगलिक कार्यों की शुरूआत हो जाती है, लेकिन इस बार मांगलिक कार्यों के लिए और इंतजार करना होगा। 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनई जाएगी, लेकिन इसके बाद भी विवाह कार्य नहीं किए जाएंगे। ज्योतिषाचार्य पंडित विष्णु प्रसाद भट्ट ने बताया कि गुरु और शुक्र के अस्त होने के चलते इस बार शादी के मुहूर्तों के लिए लंबा इंतजार करना होगा।
Makar Sankranti 2021 : इस बार मकर संक्रांति पर नहीं होंगे मांगलिक कार्यक्रम, ये है वजह
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बताया कि जनवरी, फरवरी और मार्च में विवाह के मुहूर्त नहीं हैं। जबकि, अप्रैल में भी 22 दिन बाद शादी के शुभ मुहूर्त शुरू होंगे। बताया कि 16 जनवरी से गुरु तारा पश्चिम दिशा में अस्त हो जाएगा। इसका उदय 14 फरवरी को होगा। इसी बीच 9 फरवरी से शुक्र भी अस्त हो जाएगा। इसका उदय 18 अप्रैल को होगा। शादी के मुहूर्तों के लिए गुरु और शुक्र दोनों का उदित होना जरूरी माना गया है। इसमें से एक भी अस्त रहने पर मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।
ज्योतिषाचार्य डॉ. आचार्य सुशांत राज ने बताया कि हिंदू धर्म के अनुसार जब सूर्य एक राशि से दूसरे राशि में प्रवेश करता है, तो उसे संक्रांति कहा जाता है और इन राशियों की संख्या कुल मिलाकर 12 हैं, लेकिन इनमें मेष, मकर, कर्क, तुला जैसी चार राशियां सबसे प्रमुख हैं। जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है तो मकर संक्रांति का यह विशेष पर्व मनाया जाता है। इस दिन को हिंदू धर्म में काफी पुण्यदायी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन किया जाने वाला दान अन्य दिनों के अपेक्षा कई गुना अधिक फलदायी होता है।
श्री देवभूमि लोक संस्कृति विरासतीय शोभा यात्रा समिति की ओर से 14 जनवरी को मकर संक्रांति और महाकुंभ के मौके पर उत्तराखंड समेत हिमाचल प्रदेश के सभी देवी-देवताओं, देव डोलियों, देवताओं के पश्वागणों को त्रिवेणी घाट ऋषिकेश में पवित्र गंगा नदी में स्नान कराया जाएगा। समिति के सचिव द्वारिका प्रसाद भट्ट ने बताया कि 14 जनवरी को सुबह 11 बजे त्रिवेणी घाट में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
महाकुंभ को निर्विध्न संपन्न कराने के लिए देवभूमि के समस्त देवताओं का आह्वान किया जाएगा। बताया कि भगवान बदरीनाथ, सेम-नागराजा के पावन ध्वज के नीचे यह सभी कार्यक्रम संपन्न कराए जाएंगे। बताया कि कार्यक्रम में समिति के अध्यक्ष व पूर्व कैबिनेट मंत्री डा. मोहन सिंह रावत गांववासी, ऋषिगंगा सभा के पुरोहित, साधू समाज, समाजसेवी सहित जन प्रतिनिधिगण भी शामिल होंगे। बताया कि सभी कार्यक्रम कोविड-19 की गाइड लाइन के अनुसार कराए जाएंगे।