फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

PM मोदी की तरह यहां महात्मा गांधी भी करते थे 'मन की बात'

Tue, 31 Jan 2017 05:26 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 31 Jan 2017 05:26 PM IST
विज्ञापन
mahatma gandhi man ki baat in anashakti ashram
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समय समय पर 'मन की बात' से पूरे देश को संबोधित करते हैं। आपको शायद पता न हो महात्मा गांधी भी पत्रों के जरिए मन की बात कहा करते थे। 


 

mahatma gandhi man ki baat in anashakti ashram
anashakti ashram

कम लोग जानते हैं कि उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के कौसानी में स्थित अनासक्ति आश्रम में जून 1929 में महात्मा गांधी 14 दिनों के एकांतवास पर आए थे। उन्होंने यहीं से हिमालय दर्शन किया था और हिमालयी ऊर्जा लेने के बाद देशव्यापी सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत की थी। डाक विभाग के जरिए उन्होंने यहीं से महादेव देसाई, छगनलाल जोशी, मणिलाल, सुशीला गांधी समेत कई शुभचिंतकों को पत्र भेजे थे और कई पत्र उनके पास आए भी थे।
 

mahatma gandhi man ki baat in anashakti ashram
anashakti ashram

तब यह परिसर लाल बंगला के नाम से जाना जाता था और यहां पर चाय बगान के ब्रितानी अधिकारी रहते थे। देश आजाद हुआ तो लाल बंगला का नाम बदलकर डाक बंगला रखा गया। यह डाक बंगला कभी पूरे इलाके के लिए डाक भेजने और प्राप्ति का मुख्य केंद्र था। 1964 में इस डाक बंगले का नाम अनासक्ति आश्रम पड़ा, क्योंकि यहीं पर गांधीजी ने अपनी कालजयी रचना अनासक्ति योग को 26 जून 1929 को अंतिम रूप दिया था।
 

विज्ञापन
विज्ञापन
mahatma gandhi man ki baat in anashakti ashram
anashakti ashram

यहां लगे डाक विभाग के छोटे लेटर बॉक्स से महीने में दो-चार पत्रों का ही निकलना और साहित्य सृजन ठप होना इस बात की तस्दीक करता है। हालांकि यह हाईटेक जमाने का असर भी है। जहां ‘बापू’ पत्रों के जरिए देशवासियों के लिए मन की बात लिखा करते थे और उन्होंने यह माना था कि यहां का वातावरण सेहत के लिए मुफीद है। फिर भी अब यहां मन की बात लिखने वाला शायद कोई नहीं है। 
 

विज्ञापन
mahatma gandhi man ki baat in anashakti ashram
anashakti ashram

समुद्र तल से करीब 1860 मीटर की ऊंचाई पर हिमालय की गोद में बना यह आश्रम अब भी पर्यटकों को लुभाता है, पर मोबाइल और इंटरनेट के जमाने में पत्र के जरिए देशवासियों के लिए मन की बात लिखने वाला शायद अब नहीं है। यह दीगर बात है कि अब जून में कोहरे और बादलों की वजह से शायद ही हिमालय दिखता है। फिर भी पर्यटकों से यह परिसर इन दिनों गुलजार रहता है। पिछले 30 साल से कौसानी में डाक बांटने वाले पूरन चंद्र पंत बताते हैं कि आश्रम परिसर में लगे लेटर बॉक्स से महीने में दो-चार पत्र ही निकलते हैं। बताते हैं कि अरसे पहले इसी परिसर में बड़ा लेटर बॉक्स लगा था, अब उसी स्थान पर छोटा बॉक्स टंगा हुआ है। 
 

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed