प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समय समय पर 'मन की बात' से पूरे देश को संबोधित करते हैं। आपको शायद पता न हो महात्मा गांधी भी पत्रों के जरिए मन की बात कहा करते थे।
PM मोदी की तरह यहां महात्मा गांधी भी करते थे 'मन की बात'
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कम लोग जानते हैं कि उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के कौसानी में स्थित अनासक्ति आश्रम में जून 1929 में महात्मा गांधी 14 दिनों के एकांतवास पर आए थे। उन्होंने यहीं से हिमालय दर्शन किया था और हिमालयी ऊर्जा लेने के बाद देशव्यापी सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत की थी। डाक विभाग के जरिए उन्होंने यहीं से महादेव देसाई, छगनलाल जोशी, मणिलाल, सुशीला गांधी समेत कई शुभचिंतकों को पत्र भेजे थे और कई पत्र उनके पास आए भी थे।
तब यह परिसर लाल बंगला के नाम से जाना जाता था और यहां पर चाय बगान के ब्रितानी अधिकारी रहते थे। देश आजाद हुआ तो लाल बंगला का नाम बदलकर डाक बंगला रखा गया। यह डाक बंगला कभी पूरे इलाके के लिए डाक भेजने और प्राप्ति का मुख्य केंद्र था। 1964 में इस डाक बंगले का नाम अनासक्ति आश्रम पड़ा, क्योंकि यहीं पर गांधीजी ने अपनी कालजयी रचना अनासक्ति योग को 26 जून 1929 को अंतिम रूप दिया था।
यहां लगे डाक विभाग के छोटे लेटर बॉक्स से महीने में दो-चार पत्रों का ही निकलना और साहित्य सृजन ठप होना इस बात की तस्दीक करता है। हालांकि यह हाईटेक जमाने का असर भी है। जहां ‘बापू’ पत्रों के जरिए देशवासियों के लिए मन की बात लिखा करते थे और उन्होंने यह माना था कि यहां का वातावरण सेहत के लिए मुफीद है। फिर भी अब यहां मन की बात लिखने वाला शायद कोई नहीं है।
समुद्र तल से करीब 1860 मीटर की ऊंचाई पर हिमालय की गोद में बना यह आश्रम अब भी पर्यटकों को लुभाता है, पर मोबाइल और इंटरनेट के जमाने में पत्र के जरिए देशवासियों के लिए मन की बात लिखने वाला शायद अब नहीं है। यह दीगर बात है कि अब जून में कोहरे और बादलों की वजह से शायद ही हिमालय दिखता है। फिर भी पर्यटकों से यह परिसर इन दिनों गुलजार रहता है। पिछले 30 साल से कौसानी में डाक बांटने वाले पूरन चंद्र पंत बताते हैं कि आश्रम परिसर में लगे लेटर बॉक्स से महीने में दो-चार पत्र ही निकलते हैं। बताते हैं कि अरसे पहले इसी परिसर में बड़ा लेटर बॉक्स लगा था, अब उसी स्थान पर छोटा बॉक्स टंगा हुआ है।