अगर महाशिवरात्रि पर अपना भाग्य जगाना चाहते हैं तो इन चार चीजों को पूजा से दूर रखें। ये चीजें भोलनाथ को गुस्सा दिलाती हैं।
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ketaki flower
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पडिंत विवेक जोशी ने बताया कि महादेव की पूजा में केतकी का फूल चढ़ाना वर्जित माना गया हैं, कमल और कनेर के अलावा शिव को लाल रंग के फूल भी प्रिय नहीं हैं। इसलिए शिव की पूजा में कमल और कनेर के फूल को छोड़कर सभी फूलों को वर्जित माना गया हैं।
महादेव की पूजा में हल्दी का प्रयोग वर्जित माना गया हैं। हल्दी को शिव का रूप माना जाता हैं। इसलिए हल्दी का प्रयोग शिव की पूजा में करना वर्जित हैं।
असुर जलंधर की पत्नी वृंदा को वरदान प्राप्त था की उसके पतिव्रता रहने तक उसके पति को कोई नहीं मार सकता। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने असुर जलंधर का रूप धारण किया और वृंदा के पास चले गए। वृंदा का पतिधर्म नष्ट हो गया और भगवान शंकर ने असुर जलंधर को मार उसे भस्म कर दिया। वृंदा तुलसी में परिवर्तित हो चुकी थी। इस बात से उसे निराशा उत्पन्न हुयी और उसने भगवान शंकर को अपने दैवीय तत्वों वाले पत्तों से वंचित कर दिया। इस प्रकार शिव पूजा में तुलसी अर्पित नहीं की जाती।
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सिंदूर
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स्त्रियां अपने सौभाग्य में वृद्धि के लिए सिंदूर का उपयोग करती हैं। इसके परे शिव विध्वसक, विनाशकर्ता माने जाते हैं। इसलिए शिव को सिंदूर नहीं लगाया जाता हैं।