कहा जाता है कि महाभारत के युद्घ से पहले पांडवों के श्रेष्ठ युधिष्ठिर ने भगवान शिव की बेटी की पूजा की थी, और वे युद्घ जीत गए। उत्तराखंड में इनका ऐसा मंदिर हैं, जहां सच्चे दिल से मांगी हर कामना पूरी हो जाती है। जानिए...
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mansa devi (symbol image)
- फोटो : wikipedia
मनसा देवी को भगवान शिव की मानस पुत्री के रूप में पूजा जाता है। इन्हें नागराज वासुकी की बहन के रूप में भी पूजा जाता है। माना जाता है कि एक बार नागराज ने शिव से बहन की इच्छा जाहिर की थी। जिसे शिव ने पूरा किया था। इस देवी का एक प्रसिद्ध मंदिर एक शक्तिपीठ पर हरिद्वार में स्थापित है।
मूलतः आदिवासी देवी मनसा का पूजन निम्न वर्ग के लोग करते थे परंतु धीरे धीरे उनके मंदिरों को अन्य दैवीय मंदिरों के साथ किया गया। इन्हें कश्यप की पुत्री तथा नागमाता के रूप में भी पूजा जाता है। 14 वी सदी के बाद इन्हे शिव के परिवार की तरह मंदिरों में आत्मसात किया गया।
यह मान्यता भी प्रचलित है कि इन्होने शिव को हलाहल विष के पान के बाद बचाया था, परंतु यह भी कहा जाता है कि मनसा का जन्म समुद्र मंथन के बाद हुआ।
हरिद्वार में इस देवी का मंदिर अत्यंत ही प्रसिद्ध है तथा हरिद्वार से 3 किमी की दूरी पर स्थित है। यहाँ पर माता शक्तिपीठ पर स्थापित दुख दूर करतीं हैं। यहाँ तीन मंदिर हैं। यहाँ एक वृक्ष पर सूत्र बाँधा जाता है परंतु मनसा पूर्ण होने के बाद सूत्र निकालना आवश्यक है।