देश के विभिन्न राज्यों में टिड्डी दलों का लगातार प्रकोप हो रहा है। उत्तराखंड से सटे उत्तर प्रदेश के जिलों जैसे पीलीभीत व बरेली में विगत दिनों से टिड्डियों का प्रकोप हो रहा था। प्राप्त सूचना के अनुसार उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर और चम्पावत जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में टिड्डी दलों का प्रवेश हो गया है।
Locust Attack : टिड्डियों से बचाव को पंतनगर विवि के कीट विज्ञानियों ने जारी की एडवाइजरी, किसानों को दिया ये सुझाव
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चम्पावत जिले के थपलियाल खेड़ा और ऊधम सिंह नगर में खटीमा व किच्छा क्षेत्र के सुनपर, वीरूनगला, दरऊ, छिनकी, गिद्धपुरी, आजादनगर, सैंजना आदि सीमावर्ती गावों में टिड्डी दल पहुंच गया है। इन टिड्डी दलों के द्वारा गन्ना, धान, मक्का व सब्जियों की फसलों को नुकसान पहुंचाया जा सकता है।
अतः राज्य के समस्त जिलों के किसानों तथा कृषि विभाग के कर्मचारियों को इसके आक्रमण से सतर्क रहने तथा इनके नियंत्रण हेतु पहले से ही समुचित तैयारी रखने की आवश्यकता है। टिड्डियों से बचाव को पंतनगर विवि के कीट विज्ञानियों ने एडवाइजरी जारी की है।
टिड्डियां मार्ग में आने वाली लगभग समस्त वनस्पतियों का भक्षण करती हैं। इनके आक्रमण से किसानों की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो जाती है। अतः इससे बचाव हेतु टिड्डी दलों के दिखाई देने पर किसानों को अत्यधिक शोर करके (ड्रम व टिन बजाकर) तथा खेत में धुआं करके इनको फसलों पर उतरने से रोकना चाहिए।
साथ ही किसानों द्वारा फसलों पर क्लोरपाइरीफाॅस 20 ईसी - 2.4 मिली या क्लोरपाइरीफाॅस 50 ईसी- 1.0 मिली या डेल्टामेथ्रिन 2.8 ईसी - 1.0 मिली या फिप्रोनिल 5 एससी- 0.25 मिली या फिप्रोनिल 2.92 एससी - 0.45 मिली या लैम्ब्डा साइहैलोथ्रिन 5 ईसी - 1.0 मिली या लैम्ब्डा साइहैलोथ्रिन 10 डब्ल्यूपी - 0.5 ग्राम या मैलाथियान 50 ईसी - 3.7 मिली या मैलाथियान 25 डब्ल्यूपी - 7.4 ग्राम प्रति लीटर की रात्रि से सुबह तक गहन छिड़काव की संस्तुति की गयी है, ताकि टिड्डी दल को उसके प्रवास स्थल पर ही समाप्त किया जा सके।