उत्तराखंड के देवप्रयाग में सजवाणकांडा और डुंगरियालकांड गांव के बीच स्थित जोल्या बोड़ तोक में पिंजरे में कैद गुलदार को देख लोग उसे मारने पर उतारू हो गए।
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- फोटो : AmarUjala
नौ दिन पूर्व 23 अगस्त को इसी स्थान में गुलदार ने 10 साल की बालिका को मार डाला था। गुस्साए ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचे वन क्षेत्राधिकारी (रेंजर) मणिकनाथ केएस रावत का घेराव करते हुए गुलदार को मारने की मांग की। इस पर उन्हें समझाया गया कि अभी पुष्टि नहीं हुई है कि यह गुलदार आदमखोर है कि नहीं।
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ग्रामीणों ने मांग की कि जब तक यह पता नहीं चलता कि गुलदार आदमखोर है, तब तक वन विभाग का गश्ती दल गांव में ही रहे। ग्रामीणों के गुस्से को देखते हुए रेंजर और तहसीलदार शंकर लाल चौरसिया को लिखकर देना पड़ा कि नरभक्षी पाए जाने पर गुलदार को नियमानुसार मारा जाएगा। जब तक नरभक्षी गुलदार मारा नहीं जाएगा तब तक गश्ती और शिकारी दल गांव में ही रहेंगे।
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23 अगस्त की घटना के बाद लगाए गए पिजरे में बुधवार रात जोल्या बोड़ में लगाए गए पिंजड़े में एक गुलदार फंस गया। इसकी सूचना मिलते ही आस-पास के गांव की महिलाएं और पुरुष मौके पर पहुंच गए। महिलाएं हाथ में दरांती लेकर पिंजड़े की ओर बढने लगी। जिन्हे बड़ी मुश्किल से रोका गया।
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रेंजर और तहसीलदार के पहुंचने पर ग्रामीण ने उनका घेराव कर दिया। उन्होंने कहा कि गुलदार को उनके हवाले कर दिया जाए। रेंजर ने ग्रामीणों को समझाते हुए कहा कि अभी पुष्टि नहीं हुई कि गुलदार नरभक्षी है कि नहीं। इस पर ग्रामीणों ने कहा कि जब तक पुष्टि नहीं होती, तब तक पूरे क्षेत्र की सुरक्षा की जाए। अधिकारियों से लिखित आश्वासन मिलने पर ग्रामीण शांत हुए।