हरिद्वार के मेला अस्पताल में डायलिसिस के दौरान हुई मरीज की मौत को लेकर चौंकाने वाली बातें सामने आई है। यूनिट शुरूआत से अव्यवस्थाओं के बीच चल रही थी। किडनी विशेषज्ञ नेफ्रोलॉजिस्ट डॉक्टर की तैनाती तक नहीं हुई और मात्र दो तकनीशियनों से 10 मशीन की यूनिट को चलवाया जा रहा है। यूनिट में ऑक्सीजन सिलिंडर तक नहीं हैं। इतना ही नहीं यूनिट चलाने के लिए अलग से जनरेटर तक नहीं लगाया गया।
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मरीज के मौत के बाद हंगामा
- फोटो : अमर उजाला
यूनिट में 10 मशीन और 16 बेड हैं। एक मरीज की चार घंटे डायलिसिस होती है। यूनिट को दो शिफ्टों में चलाया जाता है। यहां तक ब्लड की डायलिसिस करने के लिए प्यूरिफाई वाटर तक नहीं दिया जाता। पंप में लगे फिल्टर को बदलने के बजाय वॉश करके जैसे तैसे काम किया जाता रहा है।
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हरिद्वार में मरीज की मौत
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डायलिसिस यूनिट में अव्यवस्थाओं के चलते हुए और सामान उपलब्ध न कराने पर यूनिट के प्रभारी तौर पर काम करने वाले शेखर चंद्र डोडियाल ने जुलाई के प्रथम सप्ताह में नौकरी छोड़ दी। उनके बाद एक तकनीशियन महेंद्र सिंह और दो नर्सों ने नौकरी छोड़ दी। चार कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने के बाद दो तकनीशियन बचे हैं और हाल में ही एक नर्स ने ज्वाइन किया है।
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हरिद्वार में मरीज की मौत
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बता दें कि शनिवार को दोपहर को यूनिट की दस मशीनों पर किडनी के मरीजों की डायलिसिस की जा रही थी। अस्पताल क्षेत्र की बिजली आपूर्ति बाधित होने के बाद जेनरेटर चलाया गया। करीब दो बजे अचानक से तकनीकी खराबी के कारण जनरेटर बंद हो गया और मशीन बैकअप पर चलने लगी। कुछ ही मिनटों पर मशीन का अलार्म बजने लगा।
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देखते ही देखते दस मिनट में ही बैकअप समाप्त होने लगा। यूनिट के डॉक्टर, तकनीशियनों और नर्स ने डायलिसिस मशीन के पंप चलाकर बाहर निकले ब्लड को बमुश्किल से शरीर के अंदर पहुंचाया। सभी दस मरीजों की हालत बिगड़ने लगी। एक मरीज की हालत ज्यादा खराब होने पर उन्हें जौलीग्रांट रेफर कर दिया। सूत्रों की मानें तो मरीज विजय शर्मा (62) की मेला अस्पताल में ही मौत हो गई थी।