बाबा केदारनाथ का धन्यवाद कि मैं उस उड़ान में नहीं था। मेरे हेलीकॉप्टर ने बेल कंपनी के इस दुर्घाटनाग्रस्त हेलीकाप्टर से कोई ढाई घंटा पहले गुप्तकाशी के लिए उड़ान भरी थी। कोई 15 मिनट की ये दिल दहला देने वाली यात्रा थी। सुबह मौसम साफ था। सूरज चमक रहा था।
केदारनाथ हेलीकॉप्टर हादसा: कंपनियों की मनमानी की कहानी, साथ ही पढ़ें जो बच गए उनकी जुबानी
टिकट ले लिया मानों जंग जीत ली
एक आम यात्री के लिए केदारनाथ हवाई यात्रा का टिकट प्राप्त करना किसी जंग जीतने के बराबर है। गुप्तकाशी से 19 किमी दूर फाटा में स्थित गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) की टिकट खिड़की पर सुबह सात बजे से उमड़ी भीड़ को देखकर समझा जा सकता है कि टिकट की जंग कितनी भीषण है।
टिकट का मतलब तय स्लॉट पर यात्रा की गारंटी नहीं
ऑनलाइन से या प्रोटोकॉल या किसी अन्य प्रयास से आपने यदि हेली सेवा का टिकट प्राप्त कर लिया है तो यह तय समय पर यात्रा की गारंटी बिल्कुल भी नहीं है। मुझे 9-12 बजे का स्लॉट मिला और मैं करीब पौने चार बजे केदारनाथ पहुंचा।
घंटों वेटिंग कराते हैं पर सुरक्षा के बारे में नहीं बताते
ज्यादातर हेली कंपनियों के हेलीपेड पर टिकट लेकर पहुंचने वाले यात्रियों को घंटों इंतजार कराया जाता है। लेकिन इस दौरान कोई उन्हें बताने वाला नहीं होता कि यात्रा के दौरान उन्हें किन-किन सावधानियों का ख्याल रखना है। जब उन्हें हेलीकॉप्टर में ठूंसा जाता है तो उससे चंद मिनट पहले ट्रैफिक कंट्रोल से जुड़ा स्टाफ उन्हें बताता है कि उन्हें कहां खड़ा होना है।
देरी का मतलब केदारनाथ में नाइट हॉल्ट
दोपहर बाद हेली से केदारनाथ यात्रा करने का मतलब वहां नाइट हॉल्ट करना ही पड़ेगा। यदि आपने एक ही दिन में वापसी का टिकट भी कराया है और दोपहर के बाद आपको केदारनाथ भेजा गया है तो फिर आपको बता दिया जाता है कि केदारनाथ में नाइट हॉल्ट करना होगा। जाहिर है ऐसे समय में आपको केदारनाथ में महंगे कमरे के लिए जेब तो ढील करनी ही पड़ती है साथ ही अपना पूरा कार्यक्रम भी बदलना पड़ता है।