अपनों ने खड़े किए हाथ तो केदारधाम को बसाने आगे आए विदेशी
जून 2013 में आई आपदा से 'तबाह' हुए केदारनाथ धाम को संवारने के लिए जब अपनों हाथ खड़े कर दिए तो विदेशी इस काम के लिए आगे आए।
अपनों ने खड़े किए हाथ तो केदारधाम को बसाने आगे आए विदेशी
जब स्थानीय लोगों ने हाथ खड़े कर दिए तो नेपाल से आए तीन हजार से ज्यादा श्रमिक केदारनाथ के नवनिर्माण में सहयोगी बन गए। माइनस 12 डिग्री तापमान पर भी ये श्रमिक दिन रात एक कर रहे हैं।
अपनों ने खड़े किए हाथ तो केदारधाम को बसाने आगे आए विदेशी
निर्माण संस्था निम ने भी इन श्रमिकों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। यह बात सीबीआरआई की ओर से आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के दौरान सामने आई। जिसमें बताया गया कि किस तरह से संस्थान केदारनाथ के पुनरुद्धार में निम को तकनीक सहयोग उपलब्ध करा रहा है।
अपनों ने खड़े किए हाथ तो केदारधाम को बसाने आगे आए विदेशी
भले ही नेपाल में नए संविधान के निर्माण के बाद शुरू हुए मधेसी आंदोलन के बाद भारत-नेपाल के बीच रिश्तों की गर्माहट में कमी आई हो। लेकिन केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण में नेपाल के लोगों का श्रम रंग ला रहा है।
अपनों ने खड़े किए हाथ तो केदारधाम को बसाने आगे आए विदेशी
ज्ञात हो कि केदारनाथ में जून 2013 में आई जलप्रलय के बाद यहां मंदिर को छोड़कर सभी कुछ तबाह हो गया था। अब सीबीआरआई की तकनीक मदद से नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग (निम) केदारनाथ के पुनर्निमाण के कार्य में जुटा है। लेकिन इस कार्य में सबसे बड़ी भूमिका निभा रहे हैं नेपाल से लाए गए 3000 से ज्यादा श्रमिक।