हरिद्वार में कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले शासन और प्रशासन ने शिवभक्तों को सुविधाएं देने के लिए कई दावे किए गए। शिवभक्तों के स्वागत के लिए पलक पावड़े बिछाने की बातें भी हुई। सरकार की तरफ इस बार यहां भी कांवड़ियों पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा करने की बातें की गई। अब जबकि यात्रा अपने अंतिम चरण में है तो पुष्प वर्षा तो छोड़िए कांवड़ियों को पैदल चलने के लिए गड्ढामुक्त हाईवे नसीब नहीं हो सका।
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हरिद्वार कांवड़ यात्रा
- फोटो : हरिद्वार कांवड़ यात्रा
हाईवे पर बने गहरे गड्ढे और उनमें भरा पानी कांवड़ियों की परीक्षा ले रहा है। 17 जुलाई को कांवड़ यात्रा शुरू हो गई थी। 30 जुलाई को शिवरात्रि के दिन यात्रा समाप्त होगी। अब यात्रा के चार दिन ही बचे हैं और शासन प्रशासन कांवड़ियों को पर्याप्त सुविधा उपलब्ध नहीं करा सका। यात्रा शुरू होने से पहले कांवड़ मेले को कुंभ का रिहर्सल मानते हुए प्रदेश सरकार लगातार फोकस बनाए हुए थी।
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हरिद्वार कांवड़ यात्रा
- फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक, पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज से लेकर शासन के तमाम अधिकारी बैठकें लेते रहे। हर बैठक में इस बार बेहतर व्यवस्थाएं करने का दावा किया जाता रहा। हरिद्वार-दिल्ली हाईवे के चौड़ीकरण के चलते कई जगह गड्ढे बने हैं। पिछले दिनों हुई बारिश के बाद यह गड्ढे और गहरे हो गए हैं। गड्ढों में पानी भरा है। ऐसे में यहां से यात्रियों का गुजरना मुश्किल हो रहा है।
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अब डाक कांवड़ वाहनों की वापसी के दौरान जाम और दुर्घटना का अंदेशा बना रहेगा। पूरा मेला क्षेत्र बारिश के बाद दलदल में तब्दील है। पानी निकासी के इंतजाम नहीं होने से जगह जगह कीचड़ में निकलना मुश्किल हो रहा है। प्रशासन की ओर से कांवड़ मेला क्षेत्र में शौचालयों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई। शासन और प्रशासन खुद दावा करता रहा है कि इस बार कांवड़ में तीन करोड़ श्रद्धालु आएंगे।
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इसके अनुरूप शौचालय और पेयजल की व्यवस्था नहीं हुई। रोडी बेलवाला और पंतदीप आदि क्षेत्रों में शौचालयों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं। कांवड़ियों को एक घंटे तक का इंतजार करना पड़ रहा है। कुछ कांवड़ियों ने शौचालय के संचालकों पर 50 से लेकर सौ रुपये तक वसूलने का भी आरोप लगाया है।