जानिए, सूर्य देव के ऐसे मंदिर बारे में, जिसके बारे में दावा किया जाता है कि यह उड़िसा के कोणार्क के सूर्य मंदिर से भी बहुत पुराना है। जानिए, इस मंदिर के बारे में...
कटारमल सूर्य मन्दिर उत्तराखण्ड में अल्मोड़ा के 'कटारमल' नामक स्थान पर स्थित है। इस कारण इसे 'कटारमल सूर्य मंदिर' कहा जाता है। यह सूर्य मन्दिर न सिर्फ़ समूचे कुमाऊँ मंडल का सबसे विशाल, ऊँचा और अनूठा मन्दिर है, बल्कि उड़ीसा के 'कोणार्क सूर्य मन्दिर' के बाद एकमात्र प्राचीन सूर्य मन्दिर भी है।
सूर्य देव प्रधान देवताओं की श्रेणी में आते हैं। वे समस्त सृष्टि के आधार स्वरूप हैं। संपूर्ण भारत में भगवान सूर्य देव की पूजा, अराधना बहुत श्रद्धा एवं भक्ति के साथ की जाती है।
इस सूर्य मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है। यह मंदिर कोणार्क के विश्वविख्यात सूर्य मंदिर से लगभग दो सौ वर्ष पुराना माना गया है। मंदिर नौवीं या ग्यारहवीं शताब्दी में निर्मित हुआ माना जाता है। इस मंदिर की स्थापना के विषय में विद्वानों में कई मतभेद हैं।
कुछ इतिहासकारों का मानना है कि इस मंदिर का जीर्णोद्धार समय-समय पर होता रहा है। यह सूर्य मंदिर सूर्य देवता को समर्पित है। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण कटरामल के एक राजा ने करवाया था। प्रारंभिक मध्ययुगीन काल में कुमाऊँ में कत्यूरी राजवंश का शासन था, जिन्होंने इस मंदिर के निर्माण में योगदान दिया था।