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कैंची धाम: नीम करौली बाबा ने पहचानी थी लैरी ब्रिलिएंट में चेचक के उन्मूलन की क्षमता, पढ़ें अनोखा किस्सा...

Tue, 15 Jun 2021 05:12 PM IST
अलका त्यागी गिरीश रंजन तिवारी, अमर उजाला, नैनीताल
गिरीश रंजन तिवारी, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 15 Jun 2021 05:12 PM IST
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Kainchi Dham: Neem Karoli Baba Recognized ability to eradicate smallpox in Larry Brilliant
बाबा नीम करौली और लैरी ब्रिलिएंट - फोटो : अमर उजाला

विश्व इन दिनों कोरोना महामारी से जूझ रहा है। इससे विश्व में लगभग 37 लाख लोग मारे जा चुके हैं। ऐसी ही महामारी चेचक थी जिससे करीब 100 साल में 50 करोड़ (औसत 50 लाख प्रतिवर्ष)  लोग मारे गए थे। चेचक उन्मूलन के सराहनीय काम के लिए जिस लैरी ब्रिलिएंट को जाना जाता है उनको इसकी प्रेरणा देने वाले कोई और नहीं बल्कि नीम करौली महाराज थे।



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नैनीताल के निकट कैंची धाम जैसे दर्जनों आश्रम  स्थापित करने वाले बाबा नीम करौली की अलौकिक दृष्टि ही कही जाएगी कि उन्होंने अपने आश्रम में संन्यास की इच्छा से आए एक साधारण भक्त में चेचक से फैली महामारी के उन्मूलन की क्षमता को पहचानकर उसे इस दिशा में काम करने के लिए प्रोत्साहित किया था।

बाबा के आदेश पर जब इस अमेरिकी नागरिक लैरी ब्रिलिएंट ने चेचक उन्मूलन में सहायता के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से संपर्क किया तो डब्ल्यूएचओ ने उन्हें इसके लिए अनुपयुक्त बताते हुए वापस भेज दिया। ऐसा एक दो बार नहीं बल्कि सात बार हुआ और लैरी बार-बार बाबा के पास लौट कर आते रहे।

बाबा के आदेश पर सातवीं बार जब लैरी फिर डब्ल्यूएचओ गए तो उन्हें चिकित्सक तो नहीं लेकिन सहायक प्रशासक के तौर पर रख लिया गया। यही लैरी बाद में विश्व और एशियाई देशों में इस महामारी के उन्मूलन के प्रणेता बने।

Kainchi Dham: Neem Karoli Baba Recognized ability to eradicate smallpox in Larry Brilliant
बाबा नीम करौली - फोटो : अमर उजाला

ब्रिलिएंट का जन्म 1944 में अमेरिका में हुआ। मिशिगन विश्वविद्यालय से शिक्षा के बाद वह अमेरिकी सरकार की इच्छा के विरुद्ध 1969 में सैन फ्रांसिस्को में एक द्वीप पर रह रहे भारतीय और अन्य नागरिकों की मदद करने के लिए गए तो उन्हें खासी प्रसिद्धि मिली। इसके चलते एक फिल्म कंपनी ने उन्हें एक फिल्म में डॉक्टर की भूमिका दी। इनाम के रूप में फिल्म कंपनी ने कलाकारों को भारत की यात्रा के लिए हवाई टिकट दिया किंतु लैरी टिकट को बेचकर कुछ साथियों के साथ इस बस से यूरोप होते हुए बांग्लादेश (तब पूर्वी पाकिस्तान) आकर चक्रवात पीड़ितों की मदद में जुट गए।

Kainchi Dham: Neem Karoli Baba Recognized ability to eradicate smallpox in Larry Brilliant
कैंची धाम - फोटो : अमर उजाला

1970 में वे लंबे समय तक बाबा नीम करौली के सानिध्य में रहे। बाबा ने उन्हें सुब्रमण्यम और पत्नी ऐलेना को गिरिजा नाम दिया। एक साल बाद बाबा ने ब्रिलिएंट को चेचक के उन्मूलन के लिए यूएनओ और डब्ल्यूएचओ में सेवा देने को कहा। बाबा के ही निर्देश पर उन्होंने डब्ल्यूएचओ में सेवा शुरू की और देखते ही देखते अपनी लगन, कठोर परिश्रम, टीम वर्क और अभिनव तरीकों से चेचक उन्मूलन के प्रणेता के रूप में वैश्विक पहचान बनाई।

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नीम करौली बाबा - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

लैरी ने परोपकार को ही अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया। उन्होंने  सेवा संस्थान की स्थापना कर चीन, नेपाल, भारत, बांग्लादेश, कंबोडिया, तंजानिया, इथियोपिया और ग्वाटेमाला में तीस लाख नेत्र दिव्यांगों को आंखों की रोशनी लौटाने, भारत व श्रीलंका में पोलियो उन्मूलन, सुनामी प्रभावितों की मदद जैसे दर्जनों जनहित के अभियान चलाए। भारत के मदुरै में अरविंद नेत्र अस्पताल की स्थापना में उनका विशेष योगदान रहा। उनके कार्यों से प्रभावित होकर गूगल ने उन्हें अपना कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया। जलवायु परिवर्तन, महामारी, जल सुरक्षा के लिए ईबे के संस्थापक जेफ स्कॉल ने उन्हें स्कॉल ग्लोबल थ्रेट्स फंड का सीईओ बनाया। मिशिगन विवि ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य का प्रोफेसर नियुक्त किया।

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नीम करौली बाबा - फोटो : फाइल फोटो

ब्रिलिएंट ने बाबा के साथ अपने इन अनुभवों का वर्णन बाबा के ही एक भक्त रिचर्ड अलप्रेट रामदास की ओर से लिखित मिरेकल ऑफ लव: स्टोरीज ऑफ नीम करौली बाबा नामक पुस्तक में खुद अपने लेख में किया है। तमाम साक्षात्कारों में भी इसका उल्लेख है।  ब्रिलिएंट स्टीव जॉब्स के घनिष्ठ मित्र थे। उन्हीं की प्रेरणा से स्टीव बाबा के दर्शन को आए किंतु बाबा से उनकी मुलाकात नहीं हो पाई थी। लैरी के वर्णन मात्र से ही स्टीव बाबा से इतने प्रभावित रहे कि मृत्यु के समय तक बाबा की फोटो स्टीव के कमरे की दीवार पर लगी रही।

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