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Joshimath: ...तो क्या ‘होलो स्ट्रक्चर’से आई घरों में दरारें? अब ERT मशीन खोल सकती है धरती के अंदर का 'राज'

Sun, 08 Jan 2023 09:22 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, रुड़की
संवाद न्यूज एजेंसी, रुड़की Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 08 Jan 2023 09:22 PM IST
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Joshimath sinking IIT Roorkee ERT machine can open the secret inside earth and reason of landslide
जोशीमठ में घरों पर पड़ी दरारें - फोटो : अमर उजाला

जोशीमठ में भू-धंसाव को लेकर चौतरफा चिंता बनी हुई है। सरकार से लेकर वैज्ञानिक तक इससे निपटारे का रास्ता खोजने में जुटे हैं। वहीं, आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों का कहना है कि विभिन्न स्रोतों से दरारों में पानी जमीन के भीतर तक जाने पर भूमि को आपस में जोड़कर रखने वाला फाइन ग्रेन मैटिरियल भी बह जाता है। इसके बाद अंदर एक ‘होलो स्ट्रक्चर’ यानी सुरंगनुमा जगह बन जाती है।



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माना जा रहा है कि कई साल पहले से जमीन के भीतर अलग-अलग अंतराल में पानी जाने के चलते यह होलो स्ट्रक्चर बने हैं। इसके ऊपर लोगों ने अपने भवन खड़े कर दिए। अब मकानों के दरारें आनी शुरू हो गई हैं। 

वहीं, जोशीमठ के भू-धंसाव का कारण जमीन के भीतर मौजूद है लेकिन जब तक जमीन के भीतर की स्थिति को आंखों से न देख लिया जाए तब तक इसके असल कारण को समझ पाना मुश्किल है।

Joshimath sinking IIT Roorkee ERT machine can open the secret inside earth and reason of landslide
आईआईटी रुड़की - फोटो : अमर उजाला

इस मुश्किल को आईआईटी रुड़की में मौजूद ईआरटी मशीन आसानी से दूर कर सकती है। यह मशीन जमीन के भीतर के तीन आयामों को दिखा सकती है और अंडर ग्राउंड वाटर के मूवमेंट को बताती है। जोशीमठ में भूं-धसाव की घटना से वैज्ञानिकों की भूमिका बढ़ गई है।

Joshimath sinking IIT Roorkee ERT machine can open the secret inside earth and reason of landslide
हिमालय - फोटो : Pixabay

अब तक वैज्ञानिक खिसकते और पिघलते हिमालय व भूस्खलन पर विभिन्न तकनीकियों से जांच करते रहे हैं लेकिन जोशीमठ की त्रासदी ने अब सभी शोधों और तकनीकों को जमीन पर परखने की चुनौती पैदा कर दी है।

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जोशीमठ भू-धंसाव - फोटो : अमर उजाला

यही कारण है कि आपदा प्रबंधन विभाग ने विभिन्न क्षेत्रों के वैज्ञानिकों को अलग-अलग तकनीकों के जरिए भू-धंसाव के कारणों का पता लगाने के लिए नियुक्त कर दिया है।  वैसे कमेटी में आईआईटी रुड़की से डॉ. बीके माहेश्वरी भूगर्भीय स्थिति की जांच में लगे हैं लेकिन आईआईटी अर्थ साइंस के वैज्ञानिक डॉ. अभयानंद सिंह मौर्य का नाम भी सुर्खियों में आ रहा है।

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जोशीमठ में घरों से पानी का रिसाव - फोटो : अमर उजाला

दरअसल, डॉ. मौर्य को एक प्रोजेक्ट के अंतर्गत भूमि के भीतर पानी की स्थिति जांच के लिए ईआरटी (इलेक्ट्रिकल रेजीस्टिविटी टोमोग्राफी) मशीन मिली है। ये भूमि के भीतर कई मीटर तक 3डी इमेज हासिल कर सकती है जिससे अंडरग्राउंड वाटर के मूवमेंट का पता चलता है। 

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