नगर का पुनर्वास सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। सरकार जहां अभी तक पुनर्वास, विस्थापन को लेकर कागजी लेखाजोखा तैयार नहीं कर पाई है। प्रभावित एकमत नहीं हैं। कुछ लोग जहां वन टाइम सेटलमेंट की बात कह रहे हैं तो कई लोग अपनी जड़ों को छोड़ना नहीं चाहते हैं।
Joshimath: प्रभावित नहीं हो रहे एकमत, जोशीमठ का पुनर्वास बना सरकार के लिए चुनौती, पढ़ें ये ग्राउंड रिपोर्ट
सामारिक व सामाजिक दृष्टि से सही नहीं विस्थापन
भूधंसाव से प्रभावित जोशीमठ का विस्थापन आसान नहीं है। यह चीन सीमा से लगा भारत का सीमांत नगर है। स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सीमांत नगर, गांवों को प्रथम गांव कह रहे हैं। वहीं, पर्यटन के जरिए इन क्षेत्रों को विकसित करने की बात हो रही है। ऐसे में जोशीमठ का अन्यत्र विस्थापन का मतलब नगर को खत्म करने जैसा होगा, जो सामारिक सुरक्षा के साथ सामाजिक ढांचे के लिए शुभ नहीं है।
रोजगार का संकट हो जाएगा पैदा
प्रभावितों का कहना है कि अन्यत्र विस्थापन, पुनर्वास से उनका वर्षों पुराना व्यवसाय, रोजगार चौपट हो जाएगा। पर्यटन से जुड़े विवेक पंवार व महादेव पंवार का कहना है कि जोशीमठ में सैकड़ों लोग अलग-अलग व्यवसाय से जुड़कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।
अरबों रुपये की होगी दरकार
भूधंसाव से प्रभावित नगर में अभी तक 849 मकान और 269 परिवार प्रभावित हुए हैं। साथ ही 181 भवन असुरक्षित चिह्नित किए गए हैं। जिस तरह से हालत उपजे हैं, उससे यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। ऐसे में सरकार को मुआवजा के लिए भी अरबों रुपये चाहिए होंगे। वहीं, अन्यत्र बसावत के लिए भी बड़े बजट की जरूरत होगी। साथ ही यह कार्य दीर्घकालीन है।
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वहीं डीएम हिमांशु खुराना ने जोशीमठ आपदा प्रभावित लोगों के विस्थापन को लेकर ग्राम ढाका में चिन्हित भूमि का मौके पर निरीक्षण किया।
जोशीमठ की सुरक्षा, पुनर्वास, विस्थापन को लेकर कमेटी के साथ दो बैठकें हो गई है। कमेटी ने कुछ सुझाव दिए हैं जिसके तहत कागजी दस्तावेज भी तैयार किए जा रहे हैं। साथ ही प्रभावितों, जनप्रतिनिधियों से भी उनके सुझाव लिए जा रहे हैं। - हिमांशु खुराना, जिलाधिकारी चमोली