पिछले कई दिनों से तोड़े जा रहे सचिन के आशियाने को अब बुलडोजर भी नहीं तोड़ पा रहा है। इसके पीछे एक बड़ी वजह है। वहीं अब दूसरी तकनीक का इस्तेमाल किये जाने की योजना तैयार की जा रही है।
छावनी परिषद लंढौर स्थित संजय नारंग के सपनों के महल ढहलिया बैंक के ध्वस्तीकरण में मजदूरों के पसीने छूट रहे हैं। मजदूरों के अनुसार ढहलिया बैंक की दीवारें और फर्श काफी मजबूत बनी हैं। इन्हें तोड़ने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। इसके अलावा जेसीबी मशीनों के ब्लेड खराब हो रहे हैं।
दरअसल, सचिन का आशियाना भूकंपरोधी बना हुआ है। यह भवन तकरीबन 9 रिएक्टर स्केल तक का भूकंप झेल सकता है। इसलिए इसे तोड़ना काफी मुश्किल है। आठ दिन में मजदूर और जेसीबी उसका एक हिस्सा भी नहीं तोड़ पाए।
ढहलिया बैंक के ध्वस्तीकरण का काम आठवें दिन भी जारी रहा। ध्वस्तीकरण में लगी कंपनी यश इटंरप्राइजेज के कर्मचारी मंगलवार को भी ढहलिया बैंक के कुछ हिस्सों को तोड़ने के लिए जूझते रहे। नक्कासी और मजबूती की मिसाल ढहलिया बैंक को तोड़ने में जेसीबी मशीनों के ब्लेड खराब हो गए।
इसके कारण दो पोकलैंड मंगानी पड़ीं। इस दौरान एक पोकलैंड रास्ते में सिस्टर बाजार के पास मार्ग संकरा होने के कारण घंटों फं सी रही। इसके चलते गैस कटर से सड़क के किनारे लगी रेलिंग व जाली काटकर रास्ता बनाना पड़ा। यश इटंरप्राइजेज कंपनी के निदेशक विशाल ने बताया कि भवन की छत में लगे अत्याधुनिक फायर, एसी व बिजली की फिटिंग के कारण कुछ दिक्कतें आ रही हैं।