बाघों के चलते कॉर्बेट नेशनल पार्क की अपनी अलग पहचान है। बाघों के बेहतर संरक्षण का ही नतीजा है कि यहां बाघों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। 2018 में गणना के अनुसार, उत्तराखंड में 442 बाघ रिकॉर्ड किए गए थे जिनमें 325 बाघ कॉर्बेट लैंडस्केप में थे।
International Tiger Day: कुनबा बढ़ने के साथ बदल रहा वनराज का व्यवहार, ढूंढ रहे आसान शिकार, चौंका रही ये नई बात
कॉर्बेट के वरिष्ठ वन्यजीव वैज्ञानिक शाह बिलाल ने बताया कि बफर जोन के कुछ क्षेत्रों में देखा जा रहा है कि बाघ आसान शिकार ढूंढ रहे हैं। बफर जोन में बाघ आसानी से गाय, भैंस का शिकार कर रहे हैं। ऐसे में एक साथ चार बाघों की मौजूदगी चौंकाने वाली है। किसी भी क्षेत्र में बाघों का बढ़ना एक अच्छा संकेत है लेकिन यह चिंता का विषय भी बनता है, क्योंकि नर बाघों का वन क्षेत्र सीमित होता है।
- Ministry of Tourism (@tourismgoi) 28 July 2022
वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर दीप रजवार ने बताया कि बाघों का मूवमेंट कॉर्बेट पार्क और उससे लगे जंगलों में लगातार होता है जो बाघों का नेचुरल फिनोमिना है। कॉर्बेट में फेस फॉर की गणना के मुताबिक 252 और कॉर्बेट लैंडस्केप में 325 बाघ रिकॉर्ड हुए थे।
बाघों की संख्या के मामले में उत्तराखंड तीसरे स्थान पर
मध्य प्रदेश - 526
कर्नाटक - 524
उत्तराखंड - 442
महाराष्ट्र - 312
कॉर्बेट पार्क में बेहतर संरक्षण के चलते बाघों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। इसके साथ ही उनके व्यवहार में बदलाव दिख रहा है। बाघों को बफर जाने में आसान शिकार जैसे लावारिस गाय, बैल आदि मिल रहे हैं। बाघों के इस व्यवहार पर शोध की जरूरत है।
- धीरज पांडे, निदेशक, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व