भारत के युवा इस देश की सड़कों पर फर्राटा भरने को बेताब हैं। इसकी तस्दीक आरटीओ में बने इंटरनेशनल ड्राइविंग परमिट (आईडीपी) के आंकड़े करते हैं।
जानिए, आखिर क्यों इस देश की सड़कों पर वाहन दौड़ाने को बेताब हैं भारत के युवा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
परिवहन के क्षेत्र में रोजगार करने को देहरादून के युवाओं की पहली पसंद अमेरिका है। इस साल केवल तीन माह में 55 युवाओं ने अमेरिका के आईडीपी बनवाए है।
वहीं, इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया व कनाडा में इस क्षेत्र में काम करने का युवाओं का क्रेज कम हुआ है। एआरटीओ प्रशासन अरविंद पांडेय के मुताबिक वर्ष 2016-17 में देहरादून आरटीओ में करीब 360 आईडीपी बने थे। जिनमें सर्वाधिक संख्या इंग्लैंड और कनाडा की थी।
वहीं, इस साल जनवरी से अब तक करीब 100 दिन में 130 से अधिक आईडीपी बन चुके हैं। जिनमें सबसे अधिक 55 आईडीपी अमेरिका के बनाए गए, जबकि इंग्लैंड के 25, आस्ट्रेलिया के 20 , कनाडा के 15 तथा 15 अन्य देशों के लिए आईडीपी बनाए गए हैं।
एआरटीओ ने बताया कि विदेश में ड्राइविंग में अच्छी इनकम है। इसीलिए युवा इस क्षेत्र में वहां रोजगार करने में रुचि दिखाते है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में इस संख्या में और इजाफा होगा।