पतंजलि में बुधवार को फाल्गुनी नवसस्येष्टि यज्ञ के साथ होली मनाई गई। स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने सभी को होली की शुभकामनाएं दी। साथ ही होलिकोत्सव पर सायंकालीन सत्र में आचार्यकुलम में विशेष यज्ञ कराया गया। स्वामी रामदेव ने कहा कि इस ऋतु में चारों ओर खेतों में विभिन्न प्रकार के पुष्प और फसलें तैयार हो जाती हैं। फसलों का यज्ञ में आधान करके फाल्गुनी नवसस्येष्टि की जाती है।
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बाबा रामदेव ने खेली फूलों की होली
- फोटो : अमर उजाला
योगगुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि यज्ञ का सीधा संबंध हमारी फसलों से है। हमारा पूरा जीवन यज्ञ है और यह सारी सृष्टि भी परमात्मा का यज्ञ है। उन्होंने कहा कि होलिकोत्सव रंगों और प्यार का पर्व है लेकिन हमने इसे दूषित कर दिया है। रंगों में रसायन की मिलावट से त्वचा रोग हो रहे हैं।
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बाबा रामदेव ने खेली फूलों की होली
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आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि जिस प्रकार से अब होली पर विभिन्न रसायनयुक्त रंगों और नशे का प्रचलन बढ़ रहा है, वह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। उन्होंने होली पर प्राकृतिक रंगों का उपयोग करने की अपील की। कार्यक्रम में आचार्य प्रद्युम्न, साध्वी देव प्रिया, स्वामी परमार्थ देव, ऋतम्भरा, डा. जयदीप आर्य, राकेशकुमार, संस्कृत विद्वान आचार्य विजयपाल प्रचेता, आचार्य मनोहर लाल आर्य, आचार्य भवेंद्र सहित वैदिक गुरुकुलम, पतंजलि गुरुकुलम और पतंजलि विवि के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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बाबा रामदेव ने होली यज्ञ से पहले किया योग
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पतंजलि विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में व्याकरण, दर्शन और साहित्य विषयों में स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी के पाठ्यक्रम का भी शुभारंभ किया गया। स्वामी रामदेव ने कहा कि पतंजलि ने विद्या की प्राचीन परंपरा को बनाए रखा है। इससे युवाओं को साहित्य पढ़ने में मदद मिलेगी।
प्राचीन शिक्षा और आधुनिक शिक्षा का समन्वय करते हुए एक नया पाठ्यक्रम तैयार किया है, जिसमें गुरुकुलीय परंपरा में औपचारिक शिक्षा के साथ वैदिक शिक्षा का समावेश किया गया है। पंतजलि विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डा. महावीर अग्रवाल ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में यह एक अभिनव क्रांति है।