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Friendship Day 2018: यारों ने मेरे वास्ते क्या कुछ नहीं किया... पढ़िए एक बेमिसाल यारी

Sun, 05 Aug 2018 12:00 PM IST
दीपक सिंह नेगी, अमर उजाला, हल्द्धानी
दीपक सिंह नेगी, अमर उजाला, हल्द्धानी Updated Sun, 05 Aug 2018 12:00 PM IST
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Friendship Day special story childhood friends
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यारों की ऐसी बेमिसाल यारी के बारे में पढ़कर आपकी आंखें भी भर आएंगी। 

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 खून के रिश्तों और सगे संबंधियों के अलावा भी एक रिश्ता होता है, दोस्ती का रिश्ता, जो अन्य सभी रिश्तों की तरह ही महत्वपूर्ण होता है। कहते हैं कि स्कूल की दोस्ती सबसे अच्छी होती है। टनकपुर में दोस्तों ने अपने बीमार दोस्त का इलाज कराकर उसे नया जीवन दिया।  ‘यारों ने मेरे वास्ते क्या कुछ नहीं किया, सौ बार शुक्रिया, सौ बार शुक्रिया...’ इन दिनों सोशल साइट्स पर फिल्म गबन के इस गीत का रिमिक्स खूब चल रहा है। इस गाने का एक-एक लफ्ज टनकपुर के हयात सिंह के जीवन पर बिल्कुल सटीक बैठता 

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32 वर्षीय हयात दो साल पहले अचानक बीमार पड़ गए। सारी जमा पूंजी इलाज में खर्च हो गई, लेकिन वह ठीक नहीं हुआ और न ही बीमारी का कुछ पता चला। विधवा मां और छोटे भाई ने झाड़-फूंक से लेकर दवा-दारू तक सब किया, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। परिवार का भरण-पोषण ही बड़ी मुश्किल से हो रहा था, ऐसे में आगे के उपचार में आर्थिक स्थिति आड़े आ रही थी। इलाज के अभाव में एक साल पहले उसकी तबीयत इतनी बिगड़ गई कि वह बिस्तर से उठने में भी असमर्थ हो गया।

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हयात के दोस्तों को जब उसकी हालत का पता चला तो उन्होंने उसका हल्द्वानी के एक निजी अस्पताल में चेकअप कराया। यहां जांच में पता चला कि हयात को बोन टीबी है और उसकी रीढ़ की हड्डी दो जगह गल गई है। इस पर दोस्तों ने दिल्ली स्थित एम्स के लिए आवेदन किया, लेकिन वहां तीन माह बाद की तारीख मिली। इस पर सभी दोस्तों ने आपस में धन जुटाकर हयात को दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया। 

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यहां आठ घंटे के ऑपरेशन में उसकी रीढ़ की हड्डी के दो खराब कसेरुक इंप्लाट्स से बदले गए। करीब एक माह दिल्ली में उपचार कराने के बाद अब हयात पूरी तरह ठीक है और एक बार फिर अपने पैरों पर खड़ा हो गया है। हयात का कहना है कि अगर उसके दोस्त न होते तो शायद वह जिंदा न होता।

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